दिल्ली: मासूम को अगवा कर डीयू की छात्रा ने मांगी 5 करोड़ की फिरौती
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दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा ने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर मकान मालिक के तीन वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया। छात्रा ने बच्चे को लौटाने के लिए में पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। बाद में सौदा दो करोड़ में तय हो गया। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस की मदद से बच्चे को सकुशल मुक्त करा छात्रा को 24 घंटे में ही गिरफ्तार कर लिया और उसके छोटे भाई को भी पकड़ लिया गया।
दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी देवेंद्र आर्य ने बताया कि वसंत कुंज में रहने वाले फाइनेंसर अनुज के तीन वर्षीय बेटे शुभम (बदला नाम) के गायब होने की सूचना 11 नवंबर को मिली थी। जांच में पता चला कि अनुज के पास फिरौती के लिए व्हाट्सऐप पर मैसेज आया है और पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई है। एसीपी रमेश कक्कड़ की देखरेख में वसंत कुंज (साउथ) संजीव कुमार की टीम बनाई गई।
जांच में पता लगा कि जिस मोबाइल नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज भेजा गया है, उस पर हॉटस्पॉट का इस्तेमाल किया गया है। इसे सुनीता (बदला नाम) इस्तेमाल कर रही है। पुलिस ने अनुज के घर में छोटे भाई व मां के साथ किराए पर रहने वाली सुनीता से पूछताछ की तो उसने सच उगल दिया और बच्चे के अपहरण की बात स्वीकार कर ली। उसकी निशानदेही पर घिटोरनी में एक कमरे से अपहृत तीन वर्षीय बच्चे को मुक्त करा लिया गया। पुलिस ने सुनीता के छोटे भाई को भी पकड़ लिया।
बच्चे को रखने के लिए ही लिया था कमरा
कम समय में अधिक पैसा कमाने के लिए सुनीता ने छोटे भाई के साथ मकान मालिक के तीन वर्षीय बेटे का अपहरण करने की साजिश अगस्त में रची थी। उसने फिरौती मांगने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। उसने एक मजूदर का फोन लेकर अपने मोबाइल पर मिस्ड कॉल कर ली थी। इसके बाद मजदूर के व्हाट्सऐप को अपने मोबाइल पर ले लिया। इस व्हाट्सऐप से उसने फिरौती मांगी। मूल रूप से जौनपुर, यूपी निवासी सुनीता दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम कर रही है और प्रथम वर्ष की छात्रा है। उसका छोटा भाई 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। इसके पिता इनसे अलग रहते हैं। शुभम अनुज का इकलौता बेटा है। वह घर के सामने खेलते हुए गायब हो गया था।
अनुज के व्हाट्सऐप पर आया था मैसेज
ऐसे बच्चा नहीं मिलेगा। घर से भीड़ को बाहर भेजो। तुम्हारा बच्चा हमारे पास है। जो कहा जाए, वह करो। बच्चे को छोड़ने की एवज में पांच करोड़ रुपये चाहिए। मैसेज आने के बाद पीड़ित परिवार बहुत ज्यादा डर गया था। दूसरे मैसेज में पांच करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। पिता ने इतना पैसा न होने की बात कही। बाद में मामला दो करोड़ रुपये में तय हो गया था।
आरोपियों को मैसेज में उलझाकर रखा
शुरू में पीड़ित परिवार पुलिस के पास नहीं जाना चहाता था। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित परिवार को आरोपियों को मैसेज में ही उलझाकर रखने को कहा गया। टेक्निकल सर्विलांस से पता लगा कि मोबाइल को परिवार में ही कोई इस्तेमाल कर रहा है। कुछ देर बाद पता लगा कि नंबर को किराए पर रह रही लड़की इस्तेमाल कर रही है। सुनीता के बताने पर पुलिस घिटोरनी में कमरे में पहुंची तो बच्चे के हाथ-पैर बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस तरह बच्चे को बांधा हुआ था उसके बचने की उम्मीद कम थी।
भाई को पीटने का लेना चाहती थी बदला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चे का अपहरण साजिश के तहत किया गया। बच्चे के घर में करीब डेढ़ वर्ष पहले किराए पर रहने आई युवती ने बताया कि बच्चे को अपहरण करने की दो वजहें थीं। पहली, बच्चे के दादा गुस्से में रहते थे और उसके छोटे भाई का पीट दिया करते थे। वह बुजुर्ग से बदला लेने चाहते थे। दूसरा, उन्हें पैसे की काफी जरूरत थी।