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बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं डीयू के प्रमुख कॉलेज

Wed, 07 Jan 2015 12:45 PM IST
Updated Wed, 07 Jan 2015 12:45 PM IST
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DU colleges running without principals.

यहां यूनिवर्सिटी है, कॉलेज है, बच्चे हैं, टीचर्स हैं, पढ़ाई भी होती है पर इन सब की निगरानी करने वाला मुखिया ही नहीं है। यानी यहां प्रिंसिपल ही नहीं है। हम बात कर रहे हैं देश की जानी मानी यूनिवर्सिटी डीयू के कॉलेजों की।

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ऐसा नहीं है कि ये हाल डीयू के छोट-मोटे कॉलेजों का है। हम बात कर रहे हैं यूनिवर्सिटी के साथ ही देश के टॉप कॉलेजों में शुमार हिंदू कॉलेज, हंसराज और किरोड़ीमल जैसे कॉलेजों की।
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यहां पिछले कई सालों से कोई प्रिंसिपल ही नहीं है। यह संस्थान या तो कार्यकारी प्रिंसिपलों या स्पेशल ड्यूटी पर नियुक्त अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। यह हाल डीयू के कुल 77 कॉलेजों में से करीब 22 कॉलेजों का है।

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निर्णय लेने में होती है परेशानी

DU colleges running without principals.

जानकारी के अनुसार ‌हिंदू कॉलेज में प्रिंसिपल का पोस्ट पिछले चार से रिक्त पड़ा हुआ है। वर्तमान समय में यह पद कार्यकारी प्रिंसिपल संभाल रहे हैं। कॉलेज की वेबसाइट से पता चलता है कि यहां आखिरी बार 2008 में परमानेंट प्रिंसिपल थे, उसके बाद से यह पद कार्यकारी प्रिंसिपल ही संभाल रहे हैं।

इसी तरह हंसराज कॉलेज में पिछले दो सालों से प्रिंसिपल का पद ऑफिशिएटिंग प्रिंसि‌पल संभाल रहे हैं। वहीं किरोड़ीमल कॉलेज में यह पद कार्यकारी प्रिंसिपल संभाल रहे हैं। टीचरों का कहना है कि रोजमर्रा के काम में निर्णय लेने में तो परेशानी आती ही है इसके साथ ही बड़े फैसले लेने में प्रशासन के स्तर पर काफी मुश्किलें आती हैं।

डीयू के एससी/एसटी फोरम की प्रमुख सुमन ने आगे बताया कि ओएसडी या कार्यकारी प्रिंसिपल कम समय के लिए इस पद पर होता है और उसे अपने हर फैसले के लिए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और कॉलेज की गवर्निंग बॉडी पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए एक प्रिंसिपल का होना बहुत जरूरी है।

पिछले दस सालों से नहीं हुए कोई प्रमोशन

DU colleges running without principals.

हालांकि वाइस चांसलर दिनेश सिंह से इस बारे में कोई बात नहीं हो सकी। जबकि अधिकारियों ने बताया‌ कि रिक्त पदों के लिए विज्ञापन दे दिए गए हैं। डीयू के प्रवक्ता मलय नीरव ने इस विषय में बताया कि डीयू प्रशासन को प्रिंसिपलों के रिक्त पदों के बारे में जानकारी है।

नीरव ने बताया कि जल्द ही ये पद भर लिए जाएंगे। सुमन ने एससी/एसटी की स्टैंडिंग कमिटी और एचआरडी मंत्रालय को भी पत्र लिखा है, ताकि यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में प्रिंसिपल के पदों पर एससी/एसटी/ओबीसी के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो।

मिरांडा हाउस की प्रोफेसर आभा देव हबीब का कहना है कि यूनिवर्सिटी में सारे रूटीन कार्य रुक से गए हैं। पिछले दस सालों में यूनिवर्सिटी में कोई प्रमोशन नहीं हुए हैं।

यूनिवर्सिटी में यूजीसी के 2010 नियमन नहीं लागू किए गए हैं, जिसके कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रिंसिपलों के ना होने पर पर डीयू के टीचरों का कहना है कि कॉलेजों में केवल प्रिंसिपल ही नहीं बल्कि 4500 परमानेंट टीचरों की जो पोस्ट खाली है उन्हें भी भरे जाने की जरूरत है।

कुछ मशहूर कॉलेज जिनमें नहीं हैं प्रिंसिपल

DU colleges running without principals.
हिंदू कॉलेज
हंसराज कॉलेज
किरोड़ीमल कॉलेज
दयाल सिंह कॉलेज(इवनिंग)
लेडी श्रीराम
गार्गी
डीसीएसी
सत्यवती(मॉर्निंग)
श्यामलाल कॉलेज
विवेकानंद कॉलेज
माता सुंदरी कॉलेज
श्रद्धानंद कॉलेज
जाकिर हुसैन कॉलेज(इवनिंग)
पीजीडीएवी
देशबुंधु कॉलेज
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