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Delhi University: डीयू कॉलेजों को आईएएस कोचिंग कराने की अनुमति नहीं, प्रशासन बोला- हम सरकार द्वारा वित्त पोषित शैक्षणिक संस्थान, ऐसा नहीं कर सकते
Tue, 17 May 2022 02:29 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 17 May 2022 02:29 AM IST
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Delhi University
- फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि उनके कॉलेजों को आईएएस कोचिंग कराने का कोई हक नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह निर्णय तब आया है, जब उसके दो कॉलेज स्वामी श्रद्धानंद और हंसराज बच्चों को आईएएस कोचिंग की पेशकश कर रहे हैं।
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डीयू प्रशासन ने साफ किया है कि हम विशुद्ध रूप से सरकार द्वारा वित्त पोषित शैक्षणिक संस्थान हैं और इसलिए ऐसा नहीं कर सकते। डीयू के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य डॉ. आलोक पांडे ने कहा है कि हंसराज कॉलेज पिछले साल से एक निजी संस्थान बीकन इंस्टीट्यूट के साथ आईएएस कोचिंग प्रदान कर रहा है, वहीं श्रद्धानंद कॉलेज ने हाल ही में इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है।
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विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेज बलराम पाणि ने कहा है कि इस मामले में एक जांच की जाएगी, क्योंकि कॉलेजों को ऐसा करने की अनुमति नहीं है। हंसराज कॉलेज की वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन के अनुसार कक्षा 12वीं के अंक प्रतिशत के आधार पर कोचिंग की फीस निर्धारित की जाएगी। तीन साल की कोचिंग के लिए न्यूनतम शुल्क 75,000 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये तय किए गए हैं। फीस का भुगतान हंसराज कॉलेज के प्रधानाचार्य के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट, एनईएफटी व चेक के रूप में किया जाएगा। इसके अलावा नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि हंसराज कॉलेज में आईएएस कोचिंग की कक्षाओं में दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी छात्र प्रवेश ले सकते हैं।
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इस मामले में हंसराज कॉलेज की प्रधानाचार्य रमा शर्मा ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कहा है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी, कि ये कॉलेज इस तरह की कोचिंग दे रहे हैं।
दूसरी तरफ श्रद्धानंद कॉलेज के प्राचार्य प्रवीण गर्ग ने कहा है कि वे आने वाले महीनों में कोचिंग शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रम को शुरू करने का निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया गया है, इसके लिए विश्वविद्यालय को सूचित नहीं किया है। उन्होंने साफ किया है कि अधिसूचना के अनुसार तीन साल कोचिंग का शुल्क 1,50,000 रुपये है। इसका 25 फीसदी कॉलेज के छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में दिया जाएगा। संस्थान जून में पहले छात्रों को परिचयात्मक कक्षाएं प्रदान करेगा और फिर कोचिंग के लिए छात्रों का नामांकन करेगा। कक्षाओं के संचालन के दौरान प्रत्येक सप्ताहांत में छात्रों के बीच संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। एक कक्षा में अधिकतम 80 छात्रों को दाखिला लेने की अनुमति दी जाएगी।
डीयू कॉलेजों के डीन बलराम पाणि ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी, क्योंकि कॉलेजों को ऐसा करने की अनुमति नहीं है। वे एक सरकारी शिक्षण संस्थान हैं। वे छात्रों को कोचिंग देना शुरू नहीं कर सकते। मैं इसकी जांच बुलाऊंगा। रामानुजन कॉलेज के प्रोफेसर आलोक पांडे ने कहा है कि यदि कॉलेज कोचिंग देना चाहते हैं तो उन्हें मामूली शुल्क लेना चाहिए। ये कॉलेज छात्रों से कोचिंग के लिए लाखों रुपये वसूल रहे हैं। हम इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए इस मामले को उठा रहे हैं।