'फ्री' के नाम पर बहनों के साथ हुआ धोखा
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राखी के त्योहार पर बहनों को भाइयों से मिलाने के लिए डीटीसी ने अधिक से अधिक बसों को सड़कों पर उतारने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन यह घोषणाएं मात्र कागजों तक ही सीमित रही।
रक्षाबंधन पर फ्री के नाम पर महज 60 फीसदी बस ही सड़कों पर उतरीं, जिसके चलते सड़कों पर बहनों को बसों का घंटों इंतजार करना पड़ा। दिल्ली-एनसीआर में त्योहार पर स्टाफ की कमी के चलते कुल 14,165 ट्रिप मिस हुए हैं।
डीटीसी की इस कार्यप्रणाली से बहनों के साथ बड़ा धोखा हुआ है। वादों से इतर, इंतजाम पूरे न होने के चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
अचानक बीमार हो गए सारे ड्राइवर
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 अगस्त को राखी के दिन लगभग पचास फीसदी ड्राइवर-कंडक्टर अचानक बीमार पड़ गए थे, क्योंकि उक्त कर्मियों ने प्रबंधन को पहले छुट्टी की सूचना नहीं दी थी।
इस दिन 8922 ड्राइवर-कंडक्टर के अचानक छुट्टी पर जाने से 10 हजार से अधिक ट्रिप मिस हुए। जबकि राखी के पिछले दिन 2476 स्टाफ अचानक बीमार होकर डयूटी से गायब था।
डीटीसी प्रवक्ता आरएस मिन्हास के अनुसार प्रबंधन के निर्देश के बाद भी जो ड्राइवर-कंडक्टर राखी के दिन अचानक बीमारी के चलते छुट्टी पर चले गए थे। जिनके कारण डिपो से बाहर बस नहीं निकल सकीं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
देखिए दो दिन के आंकड़े
कुल ट्रिप मिस ---8982-----14165
स्टाफ की कमी --2476----8982
बसों का टोटा ---3419-----2602
ब्रेक डाउन------1110--------825
अन्य कारण----2687------2077