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शाम होते ही क्यों बीमार हो जाते हैं ड्राइवर-कंडक्टर?
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 27 Apr 2014 04:01 PM IST
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शाम ढलने के बाद राजधानी सड़कों पर उतरने वाली डीटीसी बसों की संख्या कम हो जाती है। दरअसल शाम की शिफ्ट में बड़ी तादाद में डीटीसी बसों के ड्राइवर और कंडक्टर अचानक बीमार पड़ जाते हैं।
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साथ ही बसें ब्रेकडाउन का शिकार हो जाती हैं। रोजाना तैयार होने वाली डीटीसी की डिपो रिपोर्ट यही बताती है। मसलन 18 अप्रैल को शाम के शेड्यूल में राजधानी की सड़कों पर 3330 बसों का उतरना तय था।
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लेकिन महज 2630 बसें ही सड़क पर निकली सकीं। कारण यह था कि 617 ड्राइवर और 61 कंडक्टर अचानक बीमार पड़ गए थे। जबकि 344 बसें ब्रेकडाउन का शिकार हो गईं। जबकि उसी दिन सुबह के शेड्यूल में 3835 बसों का उतरना तय था।
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जबकि इसकी तुलना में सड़क पर 3554 बसें ही निकलीं। क्योंकि 187 ड्राइवर और आठ कंडक्टर गायब थे वहीं 94 बसें खराब हो गईं थी।
राजधानी समेत एनसीआर में डीटीसी बसें रोजाना अलग-अलग वजहों से हजारों ट्रिप मिस कर रही हैं। बताते चलें कि 16 दिसंबर गैंगरेप की घटना के बाद राजधानी की सड़कों से शाम को बसों की कमी होने की बात सामने आई थी।
जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिल्ली सरकार को ज्यादा बसों को सड़कों पर उतारने का निर्देश दिया था। हालांकि मंत्रालय का निर्देश महज कागजी खानापूर्ति साबित हो रहा है।
असल में डीटीसी बसें शनिवार और रविवार के साथ ही अन्य कामकाजी दिनों में भी सड़कों से नदारद रहती हैं। सुबह के समय तो फिर भी यात्रियों को बस मिल जाती है। असली समस्या शाम ढले शुरू होती है। जब महिलाओं को ऑफिस के बाद घर जाना होता है।