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Delhi NCR News: दिल्ली में जल्द लागू होगी ड्रोन नीति, 1000 से ज्यादा रोजगार का लक्ष्य
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आईटी विभाग ने तैयार किया मसौदा, एक महीने में कैबिनेट के समक्ष रखने की तैयारी
-- रिसर्च क्लस्टर और फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाएं होंगी विकसित, ट्रैफिक, पुलिसिंग और आपदा प्रबंधन में बढ़ेगा ड्रोन का इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार अपनी ड्रोन नीति को अंतिम रूप देकर अगले एक महीने में कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश करने की तैयारी में है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से तैयार नीति का उद्देश्य राजधानी में ड्रोन के सुरक्षित और नियंत्रित संचालन के साथ इस क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ाना है। सरकार का अनुमान है कि नीति लागू होने के बाद 1000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
आईटी मंत्री पंकज सिंह ने शनिवार को बताया कि नीति में ड्रोन के संचालन को नियमन के दायरे में लाने के साथ रिसर्च, प्रशिक्षण और व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ड्रोन रिसर्च क्लस्टर, फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाएं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे। रिमोट पायलट प्रशिक्षण के लिए संस्थानों और कार्यक्रमों की स्थापना के साथ स्कूलों में जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
नीति में ड्रोन कंपनियों और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी, वित्तीय सहायता और राज्य जीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार ने नीति की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन भी किया था।
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60 फीसदी दिल्ली में उड़ान पर प्रतिबंध
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली का करीब 60 फीसदी क्षेत्र नो-ड्रोन जोन में आता है। वीआईपी क्षेत्रों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण यहां ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध है। प्रस्तावित नीति में सुरक्षा और भौगोलिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ड्रोन संचालन के लिए अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे। ड्रोन के दुरुपयोग पर रोक के लिए निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के डीजीसीए के डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के साथ बेहतर एकीकरण की योजना है। साथ ही काउंटर-ड्रोन के लिए एसओपी तैयार की जाएगी।
ड्रोन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ेगा, सुरक्षा पर भी जोर
सरकार पुलिसिंग, निगरानी, ट्रैफिक और आपदा प्रबंधन में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना बना रही है। ट्रैफिक जाम, सड़कों की स्थिति, बड़े आयोजनों की निगरानी और आपदा के दौरान राहत-बचाव में इनका उपयोग किया जाएगा। रियल एस्टेट, टेलीकॉम और मीडिया क्षेत्र में भी ड्रोन के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। नीति में ड्रोन से जुड़े रिसर्च क्लस्टर और विशेष फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाओं के विकास के साथ प्रशिक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार अपनी ड्रोन नीति को अंतिम रूप देकर अगले एक महीने में कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश करने की तैयारी में है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से तैयार नीति का उद्देश्य राजधानी में ड्रोन के सुरक्षित और नियंत्रित संचालन के साथ इस क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ाना है। सरकार का अनुमान है कि नीति लागू होने के बाद 1000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
आईटी मंत्री पंकज सिंह ने शनिवार को बताया कि नीति में ड्रोन के संचालन को नियमन के दायरे में लाने के साथ रिसर्च, प्रशिक्षण और व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ड्रोन रिसर्च क्लस्टर, फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाएं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे। रिमोट पायलट प्रशिक्षण के लिए संस्थानों और कार्यक्रमों की स्थापना के साथ स्कूलों में जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
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नीति में ड्रोन कंपनियों और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी, वित्तीय सहायता और राज्य जीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार ने नीति की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन भी किया था।
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60 फीसदी दिल्ली में उड़ान पर प्रतिबंध
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली का करीब 60 फीसदी क्षेत्र नो-ड्रोन जोन में आता है। वीआईपी क्षेत्रों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण यहां ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध है। प्रस्तावित नीति में सुरक्षा और भौगोलिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ड्रोन संचालन के लिए अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे। ड्रोन के दुरुपयोग पर रोक के लिए निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के डीजीसीए के डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के साथ बेहतर एकीकरण की योजना है। साथ ही काउंटर-ड्रोन के लिए एसओपी तैयार की जाएगी।
ड्रोन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ेगा, सुरक्षा पर भी जोर
सरकार पुलिसिंग, निगरानी, ट्रैफिक और आपदा प्रबंधन में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना बना रही है। ट्रैफिक जाम, सड़कों की स्थिति, बड़े आयोजनों की निगरानी और आपदा के दौरान राहत-बचाव में इनका उपयोग किया जाएगा। रियल एस्टेट, टेलीकॉम और मीडिया क्षेत्र में भी ड्रोन के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। नीति में ड्रोन से जुड़े रिसर्च क्लस्टर और विशेष फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाओं के विकास के साथ प्रशिक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।