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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Drainage system to be revamped at a cost of 5 crore

Delhi NCR News: 5 करोड़ से ड्रेनेज व्यवस्था का होगा कायाकल्प

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 05:29 PM IST
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प्री-कास्ट तकनीक से बनेंगी आधुनिक नालियां, जलभराव से मिलेगी राहत
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दीनबंधु छोटूराम मार्ग, सोम बाजार रोड और एमटीएनएल ग्राउंड रोड पर होगा काम



मोहित शुक्ला

पूर्वी दिल्ली। जिले में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जलभराव की समस्या से हमेशा के लिए निजात पाने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। विभाग की तरफ से दीनबंधु छोटूराम मार्ग राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट से विश्राम चौक, सोम बाजार रोड और एमटीएनएल ग्राउंड रोड पर स्टॉर्म वाटर ड्रेन के रीमॉडलिंग और निर्माण कार्य का जिम्मा उठाया गया है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत वाली इस हाई-टेक परियोजना से क्षेत्र के लोगों को बारिश के दिनों में लगने वाले भीषण जाम और जलभराव से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पुरानी पारंपरिक ढलाई के बजाय पूरी तरह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।


परियोजना के तहत निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ज़मीन के भीतर मौजूद जटिल यूटिलिटीज का सटीक पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग राडार (जीपीआर) तकनीक से विस्तृत जियो-सर्वे कराया जा रहा है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सड़क के नीचे बिछी पानी की लाइनों, सीवर और टेलीफोन-बिजली की केबलों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा, पूरी परियोजना की संरचनात्मक स्थिरता और डिजाइनों की गुणवत्ता जांच आईआईटी दिल्ली या अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों से कराई जायेगी, ताकि निर्माण मानकों में किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश न रहे।
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एम-50 ग्रेड की सामग्री से होगा निर्माण
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट में खुले में निर्माण करने के बजाए अत्याधुनिक फैक्टरी वातावरण में तैयार प्री-कास्ट यू-शेप ड्रेन का उपयोग किया जा रहा है। इन नालियों और उनके कवरों को सेल्फ-कॉम्पैक्टिंग कंक्रीट और एम-50 ग्रेड की उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से तैयार किया जा रहा है। कंक्रीट के निर्माण के दौरान इसकी मजबूती और दीर्घकालिक स्थायित्व को बढ़ाने के लिए केवल आरओ वाटर का उपयोग किया जाएगा। फैक्टरी में ही ऑटोमेटेड स्टीम बॉयलर सिस्टम के जरिए इन्हें तय तापमान पर पकाया जाता है जिससे कंक्रीट की गुणवत्ता अभूतपूर्व रूप से मजबूत बनती है।
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10 टन भार सहेंगी नालियां
पारंपरिक नालियों की सबसे बड़ी कमजोरी यह होती है कि वे भारी वाहनों के दबाव से जल्दी टूट जाती हैं लेकिन इस परियोजना में स्थापित होने वाली प्री-कास्ट ड्रेन न्यूनतम 5 टन व्हील लोड और 10 टन एक्सल लोड का भारी दबाव आसानी से सहने में सक्षम हैं। रिइंफोर्समेंट के लिए उच्च गुणवत्ता वाले टीएमटी सरियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा निर्माण स्थल पर क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से इन्हें जोड़ा जाएगा जिससे सड़क पर लंबे समय तक गड्ढे खोदकर काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस आधुनिक व्यवस्था से न केवल छह महीने के तय समय के भीतर प्रोजेक्ट पूरा होगा बल्कि स्थानीय नागरिकों को धूल और ट्रैफिक की परेशानियों से भी बड़ी राहत मिलेगी।
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