जीत का जादूगर: ये हैं नोएडा के 'नरेंद्र मोदी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा में एक बार फिर डॉ. महेश शर्मा ने अपनी ‘मैनेजमेंट व्यवस्था’ से सभी राजनीतिक पार्टियों को धराशायी कर दिया। इसी मैनेजमेंट तकनीक का प्रयोग नरेंद्र मोदी के वाराणसी में चुनाव के दौरान किया गया था। उसकी काट अभी तक पार्टियां नहीं तलाश पाई हैं।
डॉ. महेश शर्मा 25 साल से भाजपा से जुड़े हैं। शुरू में वह खुलकर राजनीति में नहीं आए थे। 2009 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था, भले ही हार मिली लेकिन उन्होंने सबक जरूर सीख लिया था। इसके बाद कमियां दूर करने में जुट गए।
2012 में विधायक बने और 2014 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत हुई। उनका चुनावी मैनेजमेंट काफी मजबूत हो चुका है, जिसे समझ और भेद पाना किसी दूसरे पार्टी के लिए फिलहाल मुमकिन नहीं है। वाराणसी से जब नरेंद्र मोदी चुनाव लड़े तो नोएडा से भी चुनावी व्यवस्था संभाली गई थी।
महज पांच दिन में बनाया चुनावी माहौल
जानकार मानते हैं कि नोएडा के एक-एक वोटर का पता और मोबाइल नंबर ‘भाजपा की चुनावी मैनेजमेंट टीम’ के पास है। उपचुनाव में भी एक सप्ताह तक सांसद चुपचाप देखते रहे कि किस तरह से चुनाव का संचालन किया जा रहा, है लेकिन जैसे ही हाईकमान ने चिंता जाहिर की तो मात्र पांच दिन में चुनावी माहौल बनाया।
हालांकि वोटिंग प्रतिशत भले ही न बढ़ा हो लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्र में समान रूप से भाजपा के लिए वोट पड़े। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बसपा चुनाव नहीं लड़ रही थी। पार्टी ने एक निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देने की अपील भी की थी लेकिन वोटरों ने पार्टी की बात नहीं सुनी।
सपा को हराने के लिए जिताऊ प्रत्याशी भाजपा को वोट दिए गए। साथ ही सपा ने जिस तरीके से शुरुआत में चुनाव को उठाया था, लग रहा था कि इस बार कड़ा मुकाबला होगा लेकिन जैसे ही मतदान नजदीक आया, सपा के कुछ लोगों ने दबंगई दिखानी शुरू कर दी, जिसका परिणाम सभी के सामने है। सारी मेहनत धरी की धरी रह गई।
पार्टी के शीर्षस्थ नेता मानते हैं कि मोदी का जादू कम हो गया है लेकिन नोएडा में डॉ. महेश शर्मा का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। 2017 के आगामी विधानसभा चुनाव में नोएडा में फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। नोएडा में हार-जीत का मामला सीधा डॉ. महेश से ही जुड़ता है, प्रत्याशी से नहीं।