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डीपीसीसी की रिपोर्ट: यमुना के पानी में सितंबर में तीन जगह बढ़ा प्रदूषण, दिल्ली में आईएसबीटी पर बीओडी सबसे अधिक
Fri, 09 Oct 2026 01:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:20 AM IST
सार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक वजीराबाद, निजामुद्दीन ब्रिज और असगरपुर में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर अगस्त के मुकाबले बढ़ा है। वहीं पल्ला और ओखला बैराज पर इसमें कुछ कमी दर्ज की गई।
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यमुना नदी, फाइल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में यमुना के पानी की गुणवत्ता सितंबर में तीन जगहों पर और खराब हुई। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक वजीराबाद, निजामुद्दीन ब्रिज और असगरपुर में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर अगस्त के मुकाबले बढ़ा है। वहीं पल्ला और ओखला बैराज पर इसमें कुछ कमी दर्ज की गई।
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डीपीसीसी दिल्ली में यमुना के सात स्थानों से नियमित रूप से पानी के नमूने लेता है। इनमें पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी ब्रिज, आईटीओ ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, ओखला बैराज और असगरपुर शामिल हैं। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए फीकल कोलीफॉर्म, बीओडी, घुली ऑक्सीजन और पीएच जैसे मानकों की जांच की जाती है।
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रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में वजीराबाद पर फीकल कोलीफॉर्म 1,100 से बढ़कर 1,300 प्रति 100 मिलीलीटर में सबसे संभावित संख्या हो गया। निजामुद्दीन ब्रिज पर यह 13,000 से बढ़कर 15,000 और असगरपुर में 36,000 से बढ़कर 38,000 प्रति 100 मिलीलीटर में सबसे संभावित संख्या। पहुंच गया। इसके उलट पल्ला में यह 1,400 से घटकर 1,100 और ओखला बैराज पर 23,000 से घटकर 21,000 तीन जगह बढ़ा फीकल कोलीफॉर्म रहा। वहीं, आईएसबीटी ब्रिज पर यह 35,000 और आईटीओ ब्रिज पर 17,000 पर बना रहा।
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आईएसबीटी पर बीओडी सबसे ज्यादा
यमुना के पानी में बीओडी यानी पानी में मौजूद जैविक गंदगी को खत्म करने में लगने वाली ऑक्सीजन की जरूरत भी चिंता का कारण बनी हुई है। सितंबर में अलग-अलग स्थानों पर बीओडी 2 से 30 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच रहा, जबकि तय मानक अधिकतम तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है। सबसे ज्यादा बीओडी आईएसबीटी ब्रिज पर 30 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुआ। अगस्त में भी यहां यह 28 मिलीग्राम प्रति लीटर था।
नालों का पानी भी चिंता का कारण
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, यमुना में सीधे गिरने वाले कई नालों और नजफगढ़ नहर से जुड़े नालों के पानी में भी बीओडी और टीएसएस का स्तर अधिक पाया गया है। ऐसे नालों से आने वाला गंदा पानी यमुना की स्थिति पर सीधा असर डालता है।