मोदी की अनदेखी कर फिर मिलेगा 'शहजादे' को टिकट!
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लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के परिवारवाद को अपने निशाने पर रखा और देश की जनता से अपील की कि इसे देश से उखाड़ फेंकने में उनकी मदद करें। हालांकि, आम चुनाव के कुछ महीने बाद ही महाराष्ट्र में उन्होंने दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की दोनों बेटियों (जिन्हें 'शहजादे' न सही 'शहजादी' तो कहा ही जा सकता है) के चुनाव लड़ने पर कोई आपत्ति नहीं की। लगता ऐसा है कि यह सिलसिला दिल्ली में भी जारी रहेगा।
महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में मिली सफलता के बाद भाजपा एक बार फिर से दिल्ली में होने वाले उपचुनाव के लिए कमर कसती दिखाई दे रही है। बता दें कि दिल्ली की तीन विधानसभा सीटों पर 25 नवंबर को उपचुनाव होने वाले हैं।
इस संबंध में दिल्ली भाजपा इकाई ने जोर शोर से काम करना शुरू कर दिया है। गुरूवार को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने पार्टी के क्षेत्रीय इकाई को निर्देश दिए हैं कि वे सभी चुनावी क्षेत्रों में बैठक कर चुनाव प्रचार बारे में योजना बनाएं।
तुगलकाबाद, मेहरौली और कृष्णानगर विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सतीश उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के सभी 14 जिलों की भाजपा इकाई को तैयारियों के संबंध में निर्देश दे दिए हैं।
उन्होंने बताया कि जल्द ही वह कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ तीनों चुनाव क्षेत्रों में बैठक कर तैयारियों के बारे में जानकारी लेंगे। इसी बैठक में चुनाव प्रचार के उम्मीदवारों के नामों पर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में चुनाव समिति को भी शामिल किया जएगा। हालांकि इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि इस उपचुनाव में भाजपा वंशवाद और परिवारवाद का कार्ड खेल सकती है।
परिवार के सदस्य को मिल सकता है टिकट
सूत्रों के अनुसार चुनाव समिति की बैठक रविवार को हो सकती है। प्रत्येक सीट पर चुनाव प्रचार का जिम्मा चार सदस्यीय दल के हाथ में होगा। सूत्रों के मुताबिक मालवीय नगर के पार्षद मेहरौली से चुनाव लड़ सकते हैं। जबकि दक्षिण दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी के भतीजे विक्रम बिधूड़ी को तुगलकाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
हालांकि कृष्णानगर से पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा इस पर फैसला केंद्रीय स्वास्थ मंत्री हर्षवर्धन के विदेश से लौटने के बाद ही होने की संभावना है। तुगलकाबाद और कृष्णनगर की सीट पर शुरू से ही भाजपा का वर्चस्व रहा है। मेहरौली सीट पर पार्टी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है क्योंकि बीजेपी ने इस सीट को पहली बार जीता है।
बता दें कि अंको की गणित के मुताबिक भाजपा के पास अकाली दल के विधायक को मिलाकर कुल 29 एमएलए हैं। दिसंबर 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 32 सीटें मिली थी और बहुमत के आभाव में भाजपा सरकार नहीं बना सकी थी। इसी साल मई में हुए लोकसभा चुनाव में 32 में से तीन विधायकों के सांसद बन जाने से वह तीन सीटें खाली हैं।
साभार टीओई