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MAX के समर्थन में उतरे डॉक्टरों का विरोध जारी, सरकार के खिलाफ लेंगे ये बड़ा फैसला 

Mon, 11 Dec 2017 09:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 11 Dec 2017 09:45 AM IST
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doctors supporting max hospital and will take decision against government
max hospital - फोटो : अमर उजाला

शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का डाक्टरों की तरफ से विरोध तेज हो गया है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) ने एक दिन पहले सरकार को हड़ताल की चेतावनी दी है। रविवार को डॉक्टरों के दूसरे संगठन भी डीएमए के साथ लामबंद हो गए।

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बताया जा रहा है कि सोमवार को सरकारी अस्पतालों के डाक्टर भी डीएमए के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) भी इस मसले में सोमवार को बड़ा एलान करेगा।
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सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजीव सूद का कहना है कि जब दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने इस पर जांच शुरू कर दी है तो उसके नतीजे आने से पहले ही सरकार को ऐसा फैसले लेने का नैतिक अधिकार नहीं है।
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लाइसेंस कैंसल कर सरकार ने हजारों बेगुनाहों को बेरोजगार किया है। दूसरी तरफ, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की संस्था फोर्डा के अध्यक्ष डॉ. विवेक चौकसे भी डीएमए के फैसले से सहमत हैं। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों से डॉक्टर और मरीज के रिश्ते बुरी तरह प्रभावित होंगे। फोर्डा इस मसले पर सोमवार की बैठक में फैसला लेगा।

प्राइवेट अस्पतालों को लेकर हर राज्य में कानून होगा लागू

doctors supporting max hospital and will take decision against government
max hospital - फोटो : अमर उजाला

प्राइवेट अस्पतालों में चिकित्सीय लापरवाहियों को रोकने के लिए हर राज्य में एक समान कानून लागू होने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजधानी स्थित मैक्स और गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल का हवाला देते हुए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कानून लागू करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही कहा गया है कि कानून बनने से मरीजों का स्वास्थ्य सिस्टम पर भरोसा बरकरार रहेगा। वहीं, अस्पतालों की लापरवाहियों में भी कमी आएगी। मंत्रालय ने कहा है कि वर्ष 2010 में केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया था।

इसे केंद्र शासित राज्यों को मिलाकर 16 प्रदेशों में लागू कर दिया गया है, लेकिन हरियाणा जैसे कुछ राज्यों में यह एक्ट अब तक अमल में नहीं लाया गया है। सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की एक बैठक भी बुलाई है।

इसमें कानून जल्द से जल्द लागू करने पर चर्चा होने वाली है। उधर, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन भी कुछ समय पहले कानून के पक्ष में सभी राज्य सरकारों को पत्र लिख चुकी हैं।

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