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वायरल को न समझें मामूली, खराब कर सकता है दिल
Thu, 27 Dec 2018 11:59 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Thu, 27 Dec 2018 11:59 AM IST
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- फोटो : social media
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अक्सर शरीर को कमजोर कर देने वाले वायरल को कई बार लोग मामूली समझ लेते हैं। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में एक मरीज ऐसा भी देखने को मिला है, जिसके दिल को वायरल ने खराब कर दिया। उज्बेकिस्तान निवासी सात साल की रागेना का वायरल की वजह से दिल खराब हो गया था।
हालांकि, प्रत्यारोपण के लिए वेटिंग लंबी होने के कारण डॉक्टरों ने रागेना को वेंट्रीकुलर असिस्ट मशीन लगाई है। इसके बाद रागेना की स्थिति में काफी सुधार देखा गया। क्रिसमस के मौके पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. केवल कृष्ण बताते हैं कि दो साल की उम्र में रागेना को वायरल मायोकार्डिटिस की वजह से दिल का संक्रमण हो गया था। यह संक्रमण इतना बढ़ गया कि दिल के वाल्व बहुत ज्यादा खुल गए। वे अपना मुख्य काम रक्त को धमनियों में पंप भी नहीं कर पा रहे थे।
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जब वह अस्पताल आई , तब उसके दिल का केवल 10-15 प्रतिशत हिस्सा ही काम कर रहा था। पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। वह आसानी से सांस भी नहीं ले पा रही थी। प्रत्यारोपण के लिए दिल नहीं मिल पाने के वजह से डॉक्टरों ने लेफ्ट वीएडी लगाने का फैसला किया।
डॉक्टरों की एक टीम ने बीते 4 दिसंबर को ऑपरेशन किया। पांच घंटे तक चली सर्जरी के बाद मशीन को सफलतापूर्वक उसके दिल में लगा दिया। अस्पताल का दावा है कि इस मशीन को लगवाने वाली वह एशिया पैसिफिक की सबसे कम उम्र की मरीज है।
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हालांकि, प्रत्यारोपण के लिए वेटिंग लंबी होने के कारण डॉक्टरों ने रागेना को वेंट्रीकुलर असिस्ट मशीन लगाई है। इसके बाद रागेना की स्थिति में काफी सुधार देखा गया। क्रिसमस के मौके पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. केवल कृष्ण बताते हैं कि दो साल की उम्र में रागेना को वायरल मायोकार्डिटिस की वजह से दिल का संक्रमण हो गया था। यह संक्रमण इतना बढ़ गया कि दिल के वाल्व बहुत ज्यादा खुल गए। वे अपना मुख्य काम रक्त को धमनियों में पंप भी नहीं कर पा रहे थे।
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जब वह अस्पताल आई , तब उसके दिल का केवल 10-15 प्रतिशत हिस्सा ही काम कर रहा था। पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। वह आसानी से सांस भी नहीं ले पा रही थी। प्रत्यारोपण के लिए दिल नहीं मिल पाने के वजह से डॉक्टरों ने लेफ्ट वीएडी लगाने का फैसला किया।
डॉक्टरों की एक टीम ने बीते 4 दिसंबर को ऑपरेशन किया। पांच घंटे तक चली सर्जरी के बाद मशीन को सफलतापूर्वक उसके दिल में लगा दिया। अस्पताल का दावा है कि इस मशीन को लगवाने वाली वह एशिया पैसिफिक की सबसे कम उम्र की मरीज है।