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अब पराली जलाएं नहीं बल्कि बेचकर कमाएं हर किलो पर 45 रुपया, IIT के वैज्ञानिकों ने किया कमाल

Wed, 18 Apr 2018 03:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Apr 2018 03:19 PM IST
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Do not burn the crop straw but 45 rupees  per KG, innovation of  IIT's scientists
PARALI

पराली जलाने की बजाय अब किसान एक किलो पराली से 45 रुपये तक कमा सकते हैं। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने ऐसी मशीन तैयार की है, जिसमें  पराली के साथ कैमिकल (आईआईटी दिल्ली का पेटेंट) डालने से उसमें से पल्प तैयार होगा।

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इस प्लप से इॅको फ्रेंडली कप, प्लेट आदि तैयार होंगे, जिसे खाओ-फेंको का नाम दिया गया है। खास बात यह है कि आईआईटी समराला में 20 किसानों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। जबकि राजस्थान, हरियाणा व पंजाब सरकार से इस तकनीक को अपनाने के लिए बातचीत चल रही है। 
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आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर नीतू सिंह की अध्यक्षता में रिसर्च स्कॉलर्स अंकुर कुमार व प्राचीर दत्ता ने यह तकनीक क्र्रिया लैब में डेढ़ साल में तैयार की है।

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Do not burn the crop straw but 45 rupees  per KG, innovation of  IIT's scientists
parali

प्रो. नीतू के मुताबिक, पराली जलाने के चलते आम आदमी को सांस लेना दुभर हो जाता है। प्रदूषण के चलते किसानों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। हालांकि अब किसान को जब पराली से पैसा मिलेगा तो वह उसे नहीं जलाएगा। इसके लिए एक मशीन लगेगी, जिसे आठ से दस किसान मिलकर लगा सकते हैं।

मशीन पराली को काटेगी, जिसमें आईआईटी दिल्ली द्वारा पेंटेंट कैमिकल को डाला जाएगा। इस पराली से पल्प के साथ-साथ लिगमिन तैयार होगा। प्रो. नीतू के मुताबिक एक एकड़ जमीन से करीब दो टन पराली निकलती है तो उसका एक टन पल्प तैयार होगा।

पेपर मेकिंग प्लांट वाले 45 रुपये प्रति किलो के आधार पर पल्प खरीदते हैं। मतलब किसान घर बैठे बेकार पराली से 45 रुपये प्रति किलो कमा लेंगे। जबकि लिगमिन बैटरी या फैबीकॉल आदि तैयार करने में प्रयोग होगा।

लिगमिन मार्केट में 70 रुपये प्रति किलो के आधार पर बिकता है। बता दें कि पेपर मैकिंग प्लांट वाले इस प्लप से बोर्ड, कप, प्लेट, कटोरी आदि तैयार करते हैं, जोकि फूड ग्रेन टेस्टिंग में सभी मानकों पर खरे उतर हैं।  

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