Yoga: पीठ दर्द से निजात के लिए रोजाना करें आधा घंटा योग, सामान्य योगासन से भी दूर हो सकती है समस्या
एम्स के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रेनू भाटिया के मुताबिक, एम्स में पुराने कम पीठ दर्द के रोगियों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें रोगियों को दो ग्रुप में बांटा गया। अध्ययन के नतीजे शानदार रहे।
विस्तार
पीठ दर्द से परेशान लोगों को योग से राहत मिल सकती है। महज आधे घंटे योग करने से शरीर को काफी फायदा होता है। सामान्य योगासन भी बेहतर परिणाम दे सकते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने पीठ दर्द पर योग के परिणाम जानने के लिए 108 मरीजों पर अध्ययन किया।
अध्ययन में मरीजों को दो ग्रुपों में बांट दिया। एक से योगासन करवाया गया, जबकि दूसरे को दवाओं व सामान्य एक्सााइज करवाई गई। करीब 8 सप्ताह तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ये योग करवाया गया, उनमें ज्यादा सुधार देखा गया। साथ ही दिमाग में दर्द सहने की शक्ति में भी वृद्धि पाई गई।
एम्स के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रेनू भाटिया के मुताबिक, एम्स में पुराने कम पीठ दर्द के रोगियों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें रोगियों को दो ग्रुप में बांटा गया। इनमें से एक ग्रुप को दवा व एक्सरसाइज दी गई, जबकि दूसरे ग्रुप को योग करवाया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन्होंने नियमित योग किया इसमें ज्यादा फायदा दिखा।
बढ़ रही है युवाओं में समस्या
पीठ में दर्द की समस्या युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। कुर्सी पर लंबे समय तक बैठना, सही से न बैठना व अन्य कारणों से इन मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा महिलाओं व बुजुर्गों में भी इस रोग की संख्या बढ़ रही है।
ये योगासन देते हैं राहत
- भुजंगासन
- मार्जरी आसन
- सेतुबंध आसन
- उर्ध्व हस्तोत्तान आसन
- त्रिकोणासन
- शव आसन
- मरकट आसन
- अर्ध उष्ट्रासन आसन
ब्रेन का हुआ अध्ययन
योग को लेकर किए गए अध्ययन के बाद इन मरीजों के दावों की जांच करने के लिए एम्स ने ब्रेन का भी अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि जिन रोगियों ने योग किया उनके ब्रेन में उस रसायन में भी सुधार देखा गया जिसकी मदद से दर्द सहने की क्षमता बढ़ती है। जबकि दवा व एक्साइज कर रहे मरीजों में इसमें ज्यादा सुधार नहीं दिखा।
ऐसे किया गया था अध्ययन
पीठ दर्द से परेशान पहले ग्रुप के 58 मरीजों को मेडिकल योग थेरेपी दी गई,जबकि 50 मरीज के दूसरे ग्रुप को स्टैंडर्ड केयर थेरेपी दी गई। इन मरीजों में 98 मरीजों का बेसलाइन पर अध्ययन किया। चार और आठ सप्ताह के अंतर पर जांच की गई। रोगियों की औसत आयु 42.5 साल रही। इनकी जांच के दौरान आयु, ऊंचाई, शरीर के वजन, शरीर का द्रव्यमान, सूचकांक, रक्तचाप, हृदय गति, दर्द की अवधि, दवा सेवन का समय आदि के आधार पर जांच की गई। साथ ही मरीज से उनके अनुभव भी पूछे गए।