दिवाली पर उल्लुओं पर आई आफत, दिया जा रहा लालच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दीपावली के नजदीक आते ही तस्करों ने क्षेत्र में उल्लू पकड़ने के लिए डेरा डाल दिया है। दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव से उल्लू की तस्करी के लिए लोग जट्टारी के अलावा अलीगढ़ के गांव के जंगलों की खाक छान रहे हैं।
उल्लू पकड़वाने के लिए गांव के लोगों को लालच दिया जा रहा है। धनतेरस नरक चतुर्दशी और दीपावली के दिन उल्लू के दर्शन कर बलि देना शुभ माना जाता है। अंधविश्वास से उल्लू का अस्तित्व खतरे में है।
दीपावली आते ही उल्लू की मांग बढ़ने लगी है। कुछ लोगों का मानना है कि धन की देवी का वाहन होने के नाते इसके दर्शन से शुभ लाभ की प्राप्ति होती है। उल्लू दर्शन होने से धन प्राप्त होता है।
वहीं, कुछ लोग जादू-टोना में दीपावली के दिन इसकी बलि देना शुभ मानते हैं। तांत्रिक उल्लू को मारकर उसके अंगों से ताबीज बनाकर बाजार में अच्छे दामों पर बेचते हैं। देहात क्षेत्र के लोग इनके खरीदार हैं।
पुलिस को नहीं कोई भनक
5 हजार रुपये तक का लालच-
कुछ गांव के लोगों को पैसों का लालच देकर उन्हें भी इस काम में लगाया है। एक उल्लू को पकड़ने की कीमत एक से लेकर पांच हजार तक दी जा रही है।
तस्कर और गांव के लोग पूरी रात मांस के टुकड़ों को पेड़ों पर टांग कर उल्लू के वहां आने का इंतजार करते हैं। उधर, एनसीआर में एक उल्लू की कीमत बीस हजार से लेकर एक लाख तक है। अच्छे दाम मिलने पर तस्करों को पुलिस से भिड़ने का भी डर नहीं रहता।
पुलिस को नहीं तस्करी की भनक-
जेवर थाना पुलिस को जेवर खादर के वन रेंज लगभग 60 हेक्टेयर सहित क्षेत्र में फैले तस्करों के जाल की भनक तक नहीं है। सूत्रों की माने तो तस्कर प्रतिदिन पांच से छह उल्लुओं को पकड़कर दिल्ली एनसीआर में बैठे बड़े तस्करों को सप्लाई कर रहे हैं।