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पटाखों से जहरीली हुई आबोहवा, तीन गुना हुआ प्रदूषण

Fri, 13 Nov 2015 08:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 13 Nov 2015 08:47 PM IST
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Diwali crackers were poisonous climate, pollution tripled.

दिवाली पर शहरवासियों ने जमकर पटाखे चलाए। जिसकी वजह से शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गया।

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बढ़े प्रदूषण की वजह से दिवाली के एक दिन बाद स्मॉगकी चादर नजर आई। जिस वजह से सुबह की ठंड भी कम हो गई। हालांकि पिछली दिवाली की तुलना में इस बार प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम रिकॉर्ड किया गया।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली पर हुई आतिशबाजी की वजह से फैले प्रदूषण की सेक्टर-1 में जांच की थी। विभाग ने शुक्रवार को इसका रिकॉर्ड जारी कर दिया है।
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हवा में आरएसपीएम-10 (रेस्पायरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) मानक से तीन गुणा से भी ज्यादा मिला। इस बार इसका स्तर 361.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

खराब पड़ी है मशीन, नहीं हुई पीएम-2.5 की जांच

Diwali crackers were poisonous climate, pollution tripled.

वहीं सल्फरडाई ऑक्साइड  की मात्रा 18.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई और नाइट्रोजनडाई ऑक्साइड 38.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। शहर में सिर्फ सेक्टर-1 से ही प्रदूषण की जांच की गई है।

हालांकि शहरवासियों का कहना है कि  सेक्टर-12, 11, 22, 33, 34, 50, 51 के अलावा दूसरे आवासीय सेक्टरों में प्रदूषण की जांच की जाती तो इसका स्तर और बढ़ सकता था।

प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा प्रदूषण कम हुआ है। लेकिन इसको बहुत ज्यादा सुधार नहीं माना जा सकता है।

पीएम-2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) हवा में मौजूद सूक्ष्म कण होते हैं। सांस लेने के दौरान ये कण शरीर में जले जाते हैं और फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। ये अस्थमा के मरीज के लिए घातक होते हैं।

अस्पताल में बढ़े अस्थमा के मरीज

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास पीएम-2.5 को नापने की मशीन खराब पड़ी है। इस वजह से इसकी जांच नहीं की जा सकी है। बता दें कि पीएम 2.5 की मशीन प्रदूषण विभाग के ऑफिस के ऊपर और सेक्टर-38 के सरकारी गेस्ट हाउस में लगी हुई है। लेकिन ये दोनों मशीन खराब पड़ी हैं।

अगले साल ऑटोमैटिक स्टेशन से होगी जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश कुमार ने बताया कि अब विभाग मैन्युअल प्रदूषण की जांच करते हैं। इससे करने में 24 घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है।

ऑटोमैटिक स्टेशन मशीन लगाने की बात चल रही है। इसके लिए तीन जगह चिह्नित हुई हैं। जल्द ही इसमें से एक जगह मशीन लगा दी जाएगी। इसके बाद तुरंत हवा में मौजूद सभी तत्व के बारे में जानकारी मिल जाएगी।

प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अस्पतालों में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में अस्थमा, हार्ट, फेफड़ों की बीमारी के मरीज बढ़ गए हैं। ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना अस्थमा और सांस के मरीज 20 फीसदी से ज्यादा आ रहे हैं।

डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि इस समय अस्थमा, एलर्जी, हार्ट समेत कई बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। इन मरीजों के सुबह की वाक से बचना चाहिए और पीने में ज्यादा ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां लें और स्वास्थ्य को लेकर पूरा एहतियात बरतें।

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