शाह के इस कारनामे के पीछे क्या है राज?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मंगलवार देर रात की जनसभा से चुनाव परिणाम पर कितना प्रभाव पड़ेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है, पर इसके आयोजन स्थल, जनसभा के समय और जनसभा के प्रचार प्रबंधन को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं। जनसभा से जिले के कई वरिष्ठ नेताओं की दूरी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
अमित शाह की गुड़गांव में किसी चुनाव को लेकर यह पहली जनसभा थी। इसके लिए एक मुहल्ले के छोटे से ग्राउंड का चयन पार्टी के एक वर्ग को अच्छा नहीं लगा रहा है।
सभास्थल भी ऐसी जगह स्थित है जहां दूसरे मुहल्ले के लोगों का पहुंचना बेहद परेशानी भरा था। एक तरफ से पुलिस ने इंट्री बंद कर रखी थी, जबकि दूसरी तरफ से लोग एक्सप्रेसवे के लिंक रोड की उलटी दिशा से यहां तक पहुंच रहे थे। इसे जनसभा में कम लोगों के आने का कारण माना जा रहा है।
कई तरह के सवाल
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अमित शाह जैसे राष्ट्रीय नेता के लिए मुहल्ले के ग्राउंट का चयन कहीं से समझदारी नहीं थी। इसकी जगह किसी बड़े मैदान को चुना जाना चाहिए था। उल्लेखनीय है कि जनसभा देर रात लघु सचिवालय के पीछे बेरी वाले बाग के पास ग्राउंड में हुई थी।
शाह की जनसभा से जिले के बड़े नेताओं का गायब रहना भी कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। पूर्व सांसद तथा राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर सुधा यादव भी मंच पर मौजूद नहीं थीं।
उनसे बात करने पर पता चला कि वह मंगलवार को नारनौल में थीं। मंच पर अधिकांश नगर निगम के वे पार्षद नजर आए जिन्होंने पिछले तीन महीने के भीतर भाजपा का दामन थामा है।
मोदी के अमेरिकी दौरे पर चर्चा
शाह की जनसभा को लेकर अंत तक भ्रम की स्थिति रही। अखबारों में इसका समय 4:40 बजे बताया गया था। जबकि पार्टी प्रत्याशी उमेश अग्रवाल और भाजपा कार्यालय की ओर से एसएमएस भेजकर इसका समय सात और साढ़े सात बताया जा रहा था। इसके अलावा लोगों के मोबाइल पर तीन बजे की सभा की वाइस कॉल आ रही थी।
जनसभा में अमित शाह की मौजूदगी में नेताओं का स्थानीय मुददे नहीं रखना भी पार्टी के एक वर्ग को अखर रहा है। पार्टी के इस खेमे का कहना है कि अंडर पास, जाम, महिला सुरक्षा, 900 मीटर दायरा आदि गुड़गांव के जवलंत मुददे हैं। लेकिन इसपर किसी ने कुछ नहीं कहा। केवल राष्ट्रीय और मोदी के अमेरिकी दौरे पर ही चर्चा होती रही।
इसके अलावा मंच से जिले के कार्यकारी अध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज को नहीं बुलवाना भी पार्टी की लॉबी को अच्छा नहीं लग रहा। वह इसे अपमान मान रहा है। हालाकि भारद्वाज पूछने पर इसे कोई अहम मुद्दा नहीं मानते।