यूपी: घर के 'भेदियों' से परेशान है हर पार्टी
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सूत्र बताते हैं कि टिकट बंटवारे को लेकर सबसे ज्यादा विद्रोह की स्थिति एक पार्टी में उपजी। आरोप लगे कि ताकतवर उम्मीदवारों को किनारे कर दिया गया और कमजोर प्रत्याशी उतार दिया।
अभी तक सब कुछ सामान्य नहीं हो सका है। रूठे लोग चुप तो हुए लेकिन मन से काम नहीं कर रहे। कार्यकर्ता भूखे रह रहे हैं। दबी जुबान से वह कहते फिर रहे हैं कि जब ऐसा ही था तो टिकट ही नहीं लेना चाहिए था।
एक पार्टी की हकीकत तो बिल्कुल ही अलग है। जिसको टिकट मिलने का भी अंदाजा नहीं थे, पार्टी ने उन्हें जबरन मैदान में उतार दिया। वह उसी मन से प्रचार के लिए चल पड़ते हैं और राय मशविरा भी नहीं करते।
कई साथी ऐसे हैं, जो दूसरी पार्टी को वोट देने की तैयारी कर रहे हैं। प्रत्याशी ने तसल्ली कर ली कि जितने वोट मिल जाएंगे, उतना ही ठीक। अब दोबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलने वाला।
सारा राज उगल रहे हैं ‘भेदिए’
नोएडा उपचुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियां ‘भेदियों’ से परेशान हैं। अपने घर में लगी आग बुझाने के बजाय दूसरे के घरों में ताकझांक की जा रही है। बनावटी चेहरों ने पार्टियों को खोखला कर दिया है। चुनाव प्रचार के नाम पर निकलते हैं लेकिन कहीं और खर्राटे मारते हैं। इतना ही नहीं रात के अंधेरे में दूसरी पार्टी के लोगों से मिल सारा राज उगल रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो एक पार्टी में चुनाव प्रचार में भीड़ इतनी होती है कि चेहरे गिनना और पहचानना मुश्किल है। कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो दिन में किसी के साथ रहेंगे और रात होते ही किसी दूसरी पार्टी में घुस जाते हैं।
सुबह किसी का सम्मान करते दिखेंगे तो शाम को किसी दूसरे प्रत्याशी के गले में माला डालते मिल जाएंगे। इतना ही नहीं इतना ही नहीं ये दूसरी पार्टी के लोगों से मिल सारा राज भी उगल रहे हैं। पार्टी में किसी तरह की खींचतान तो नहीं है, लेकिन विश्वास करने वाले गिने-चुने ही हैं।