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विकलांग यात्रियों को चाहिए मॉडल स्टेशन
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 24 Feb 2015 01:14 AM IST
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रोजाना पौने दो लाख यात्री गाजियाबाद स्टेशन से सफर करते हैं, लेकिन ए-ग्रेड लिस्ट में शामिल गाजियाबाद स्टेशन पर विकलांग यात्रियों के आने-जाने तक की सहूलियत नहीं है।
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विकलांग और बीमार यात्रियों को ट्रेन पकड़नी हो तो फिर सफर से ज्यादा परेशानी उन्हें पार्किंग से प्लेटफार्म तक झेलनी पड़ती है।
रेलवे ने गाजियाबाद स्टेशन को माडर्न बनाने और विकलांग यात्रियों को लिफ्ट व एस्केलेटर की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए चार साल पहले करीब 8 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया, लेकिन अभी तक न तो एस्केलेटर लगे और न लिफ्ट।
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चार साल से स्टेशन को माडर्न बनाने के लिए चल रहा काम भी पूरा नहीं हुआ। ऐसे में भाजपा सरकार के बजट में इस बार आम यात्रियों को सुविधाओं और सुरक्षा की दरकार है तो विकलांग यात्रियों को प्लेटफार्म तक आने-जाने के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट की।
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व्हील चेयर तो है लेकिन रैंप नहीं
नोएडा, गाजियाबाद और साहिबाबाद के यात्री गाजियाबाद स्टेशन से ही सफर शुरू करते हैं। ऐसे में यहां सभी सुविधाएं होना लाजमी है। गाजियाबाद स्टेशन पर विकलांगों के लिए व्हीलचेयर तो है, लेकिन रैंप नहीं है। विकलांग और बीमार यात्रियों को प्लेटफार्म तक ले जाना हो तो परिजन चार कुली को बुक करते हैं। ये कुली विकलांग या बीमार यात्री को व्हीलचेयर समेत लेकर सीढ़ियां चढ़ते हैं और प्लेटफार्म पर फिर इसी तरह उन्हें उतारा जाता है।
अचानक प्लेटफार्म बदलने पर छूट जाती है ट्रेन
विकलांग और बीमार यात्रियों की ट्रेनें अक्सर उस दौरान छूट जाती है जब अचानक ट्रेनों के प्लेटफार्म बदल दिए जाते हैं। किसी तरह मशक्कत कर ये यात्री एक प्लेटफार्म पर पहुंचने के बाद व्हीलचेयर स्टेशन पर जमा करा देते हैं। ऐसे में अचानक प्लेटफार्म बदलने पर इनका दूसरे प्लेटफार्म पर जाना मुश्किल हो जाता है।
जम्मू जाने के लिए ट्रेन पकड़नी थी। बीमारी के कारण सीढ़ियां नहीं चढ़ीं जाती। लिफ्ट या एस्केलेटर न होने की वजह से परिजन पहले व्हीलचेयर लेकर आए और फिर कुली को बुलाया। किसी तरह प्लेटफार्म पहुंचाया। विकलांग या बीमार यात्रियों के लिए स्टेशन पर व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। - विजय अग्रवाल, कविनगर