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हिंसा के बादः दिव्यांग दंपती को चिंता अब कैसे होगा गुजारा
Wed, 04 Mar 2020 06:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 04 Mar 2020 06:44 AM IST
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delhi violence
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में अब माहौल शांत होने लगा है। हिंसा के निशान भी कुछ दिनों में मिट जाएंगे, लेकिन दंगों में अपना सब कुछ गंवाने वालों के दिलों से ये निशान ताउम्र नहीं मिटेंगे। हिंसा में अपना सब कुछ गवां चुके लोगों के सामने अब गुजारे का संकट है।
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चांद बाग से सटे मूंगा नगर में रहने वाले सरस्वती और सुरेश चंद पैरों से दिव्यांग हैं। उपद्रवियों ने इनकी कमाई का एक मात्र जरिया दुकान को आग के हवाले कर दिया और सामान लूट ले गए। इस दिव्यांग दंपती को चिंता खाए जा रही है कि अब आगे का गुजारा कैसे होगा?
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सरस्वती और उनके पति सुरेश चंद बुलंदशहर के रहने वाले हैं और करीब पंद्रह साल से मूंगा नगर की गली नंबर सात में रहते हैं। वे यहां मूंगानगर मेन रोड पर परचून की चलती-फिरती दुकान चलाते थे।
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24 फरवरी की देर शाम चांद बाग की ओर से आए उपद्रवियों ने पहले पथराव शुरू कर दिया। पड़ोसियों ने दोनों दिव्यांग दंपति को वहां से बचाकर घर तक पहुंचाया। उपद्रवियों ने लूटपाट के बाद दंपती की दुकान को आग के हवाले कर दिया।
दोनों की ट्राई साइकिलें भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दी। लेकिन किराये के मकान में परिवार संग रहने वाले इस दंपती के सामने मकान का किराया देने और घर चलाने का संकट है। इनके दो बच्चे हैं। नौ साल का बेटा केशव और आठ साल की बिटिया प्रियंका। दोनों पास के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं।
सरस्वती का कहना है कि उनके पास कमाई का एक ही जरिया था, जिसे उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई करके गए हैं। अब तक कोई मदद नहीं मिली है। सुरेश का कहना है कि ऐसा कोई परिचित भी नहीं है, जो मदद करे। फिलहाल पड़ोसी ही उनका सहारा बने हुए हैं।