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20 सेकेंड में मिले 25 हजार फोटो  से होगा डिजिटल शव परीक्षण

Wed, 04 Dec 2019 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 04 Dec 2019 05:17 AM IST
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Digital autopsy will be done from 25 thousand photos found in 20 seconds
aiims - फोटो : file photo

महज 20 सेकेंड में 25 हजार 3डी फोटो लेकर सीटी स्कैन मशीन के जरिये डिजिटल ऑटोप्सी (शव परीक्षण) किया जा सकता है। बगैर शव विच्छेदन किए अत्याधुनिक तकनीकी से भी महज 10 मिनट में उन मामलों में पोस्टमार्टम किया जा सकता है, जहां शव की चीरफाड़ आदि की जरूरत नहीं होती। शरीर से आंतरिक सैंपल लेने की जरूरत भी हो तो वहां इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

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आने वाले दिनों में केंद्र की मदद से विभिन्न राज्य अपने यहां के संस्थानों में इसे स्थापित कर सकते हैं। इसके लिए एम्स प्रशिक्षण देगा और आईसीएमआर की निगरानी में केंद्र की ओर से मदद भी की जाएगी। मंगलवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार ने डिजिटल ऑटोप्सी पर यह जानकारी दी है। इसे लेकर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में काफी दिन से काम भी चल रहा है। 
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एम्स के फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि अगले दो से तीन महीने में दिल्ली एम्स में डिजिटल ऑटोप्सी शुरू होगी। दिल्ली के दक्षिणी, दक्षिणी पूर्वी जिले के तहत आने वाले करीब 35 पुलिस थानों के अलावा एम्स के मुख्य परिसर और ट्रॉमा सेंटर में मृत मरीजों के पोस्टमार्टम में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि विसरा लेने की स्थिति में पारंपरिक तरीके से ही शव परीक्षण किया जाएगा। 
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यह है डिजिटल ऑटोप्सी
देश में अब तक सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में पारंपरिक तरीके शव परीक्षण किया जाता है। दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जो डिजिटल ऑटोप्सी भी करते हैं। इसके तहत शव को एक बैग में रखकर सीटी व एमआरआई स्कैन किया जाता है। स्कैन के जरिए करीब 20 सेंकड में 25 हजार तक फोटो मिलते हैं। इनकी समीक्षा के आधार पर मौत का कारण, भीतरी चोटें, टिश्यू आदि के बारे में पता चलता है। यह रिकॉर्ड रखना भी आसान है, ताकि जरूरत के वक्त बाद में इस रिकॉर्ड को निकालकर समीक्षा की जा सके।

डिजिटल ऑटोप्सी में पारदर्शिता ज्यादा
एम्स के फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक यादव बताते हैं कि नई तकनीक की मदद से शव विच्छेदन की जरूरत नहीं होती। इससे मोर्चरी भी संक्रमित होने से बचती है और शव परीक्षण में पारदर्शिता भी आती है, क्योंकि पूरा रिकॉर्ड फॉरेंसिक विशेषज्ञ के सामने होता है। 

क्यों जरूरी है डिजिटल ऑटोप्सी
अगर कोई मरीज एम्स के किसी विभाग में भर्ती है। उस दौरान मरीज की स्थिति, बीमारी और उपचार आदि के बारे में डॉक्टरों को पूरी जानकारी होती है। बावजूद इसके, उपचार के दौरान मौत होने पर मरीज का शव परीक्षण एम्स में पारंपरिक तरीके से होता है। ऐसे केस में शव विच्छेदन की आवश्यकता नहीं होती। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के अनुसार, 90 फीसदी मामलों में मृतक के परिजनों को शव विच्छेदन में काफी तकलीफ होती है। 


नए भारत में आगे बढ़ेगा फॉरेंसिक विज्ञान
डॉक्टरों के अनुसार, स्विजरलैंड, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नार्वे, कनाडा जैसे देशों में फॉरेंसिक विज्ञान काफी आगे पहुंच चुका है, लेकिन हम अब भी पुराने तरीके पर अटके हैं। डिजिटल ऑटोप्सी एक नया रास्ता है। इसके शुरू होने के बाद नए शोध और नई तकनीक को अपनाने का रास्ता खुल जाएगा। आने वाले दिनों में भारत में भी रोबोट की मदद से शव परीक्षण संभव हो सकता है।

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