{"_id":"5eeff54c8ebc3e42db6b02c4","slug":"difficult-to-get-rid-of-heat-in-covid-19-coaches-in-delhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनौतीः कोविड-19 कोचों में गर्मी से निजात पाना हो रहा है मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनौतीः कोविड-19 कोचों में गर्मी से निजात पाना हो रहा है मुश्किल
Mon, 22 Jun 2020 05:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 22 Jun 2020 05:33 AM IST
विज्ञापन
गर्मी से बचाव की कोशिश...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे के कोविड-19 केयर कोचों में मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर व्यवस्था की गई है। इन कोचों में शॉवर, मच्छरदानी, बायो टॉयलेट, पावर सॉकेट, ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य चीजें उपलब्ध कराई गई हैं लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत मेटल के बने इन कोचों के अंदर गर्मी से पार पाने की है।
विज्ञापन
कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए रेलवे ने 5321 नॉन एसी स्लीपर श्रेणी के आईसीएफ (पुरानी डिजाइन) कोचों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया है। इनमें हल्के लक्षणों वाले या संक्रमण के संदिग्धों की देखभाल की जाएगी। संक्रमित मरीजों को अलग कोचों में रखा जाएगा।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि पांच राज्यों में 960 कोचों को पहले से तैयार रखा गया है। इनमें 503 कोच दिल्ली और 372 कोच उत्तर प्रदेश में हैं। कोच तैयार खड़े हैं लेकिन अभी तक कोई इनका इस्तेमाल करने वाला नहीं है। स्वास्थ्यकर्मियों के आराम के लिए दो या इससे अधिक एसी कोच भी मुहैया कराए जाएंगे।
विज्ञापन
देश के ज्यादातर हिस्सों में जून के महीने में काफी गर्मी होती है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती मरीजों की सुविधा को लेकर है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि मानसून के आने से कुछ राहत मिलेगी अन्यथा इन मेटल के कोचों में मरीजों के लिए रहना काफी मुश्किल भरा होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नॉन एसी कोचों के इस्तेमाल को कहा था। अधिकारियों का कहना है कि इन कोचों के अंदर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है जोकि रहना असहनीय बना सकता है।
इनके इस्तेमाल से तापमान में कमी लाने की हो रही कोशिश
रेलवे बांस की चिक का इस्तेमाल कर कोचों के अंदर तापमान को कम लाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही कोचों के भीतरी हिस्से को सामान्य बनाए रखने के लिए उनके ऊपर कवर शीट डाले गए हैं। बबल रैप फिल्म्स को डिब्बों पर लपेटा जा रहा है। इससे डिब्बे के अंदर का तापमान एक डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है।
प्रयोग के तौर पर आइसोलेशन कोच की छत पर गर्मी को कम करने में मददगार पेंट की परतें भी चढ़ाई गई हैं। इस तकनीक से भीतर का तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने उत्तरी एवं उत्तर मध्य रेलवे में 100 परिवर्तित कोच की छत को प्रयोग के तौर पर पेंट करने का आदेश दिया है। इसमें आईआईटी बॉम्बे की भी मदद ली जा रही है। पोर्टेबल कूलरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे तीन डिग्री तक पारा कम किया जा सकता है।