फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   diesel auto should be banned in gurgaon

डीजल ऑटो पर भी पाबंदी लगवा दो जज साहब

Thu, 05 May 2016 09:56 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 05 May 2016 09:56 AM IST
सार

  • दिल्ली-एनसीआर में चल रहे हैं जानलेवा धुंआ फेंकने वाले ऑटो
  • पुलिस और प्रशासन के सामने ही उगलते हैं जहर, फिर भी नहीं कटता चालान
  • सभी शेयरिंग ऑटो हैं डीजल से चलने वालेशाहनवाज आलम

विज्ञापन
diesel auto should be banned in gurgaon

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने डीजल कैब पर पाबंदी लगाकर प्रदूषण को कम करने की कवायद तो शुरू कर दी है लेकिन प्रदूषण के खिलाफ जंग में ऑटो सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। डीजल कैब-टैक्सी संचालक अब कह रहे हैं कि जज साहब जानलेवा धुंआ फेंकने वाले ऑटो को कब हटवाओगे?

विज्ञापन


प्रदूषण कम करना है तो सबसे पहले डीजल से चलने वाले ऑटो बंद करवाने होंगे। पुलिस और प्रशासन के सामने ही ये ऑटो जहर उगलते हैं, फिर भी इनका चालान नहीं कटता है। सिविल लाइन, रेलवे रोड से लेकर तमाम सड़कों पर दौड़ते ऑटो शहर की आबोहवा में को प्रदूषित कर रहे हैं।
विज्ञापन


दरअसल, पुराने गुडग़ांव और शहर के कई हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं होने के कारण ऑटो ही यहां की लाइफ लाइन हैं। करीब 35 हजार ऑटो यहां की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शेयरिंग ऑटो में सभी डीजल के हैं, जो यहां की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 15 वर्ष पुराने ऑटो को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर अब तक रोक नहीं लग पाई है। नए डीजल ऑटो में भी सवारियां इतनी ठूस ली जाती हैं कि वह धुंआ फेंकने लगते हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक आरएस राठी बताते है अगर पुराने वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाए, तो गुडग़ांव के प्रदूषण में एक साल के अंदर एक तिहाई से अधिक कमी आ सकती है।

मुख्य चौराहों पर प्रदूषण का स्तर 900 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक से घटकर सामान्य 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक पहुंच सकता है। इसलिए प्रदूषण कम करने के लिए इन ऑटो पर भी लगाम लगाने की जरूरत है।

कैसे बढ़ रहा है ऑटो से प्रदूषण का ग्राफ
साइबर सिटी में सार्वजनिक परिवहन के माकूल बंदोबस्त नहीं होने के कारण लोगों के आने-जाने का सबसे बड़ा साधन ऑटो हैं। जानकारों की मानें तो शहर में चल रहे ऑटो में एक चौथाई 10 साल पुराने डीजल की गाडिय़ां हैं।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग के वैज्ञानिक बताते हैं कि कम वायु में डीजल या पेट्रोल के जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस अधिक मात्रा में पैदा होती है। करीब 100 नैनो पार्टिकल मैटर निकलते हैं, जिससे पर्टिकुलेट मैटर की संख्या में इजाफा होता है। कार्बन मोनो ऑक्साइड के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा अधिक निकलती है। जो खतरनक है।

इसमें पॉल्यूशन कैटालिस्ट नहीं होने की वजह से प्रति लीटर डीजल या पेट्रोल पर 96 फीसदी अधिक प्रदूषण पैदा होता है। जबकि नई गाडिय़ों पर कैटालिस्ट होने की वजह से इसमें प्रदूषण का स्तर कम होता है। 

ट्रकों से भी बढ़ रहा है प्रदूषण
गुडग़ांव के चारों ओर मुख्य रूप से चार सड़कें हैं। गुडग़ांव-जयपुर रोड और दिल्ली-गुडग़ांव-अलवर, गुडग़ांव-पटौदी-रेवाड़ी और दिल्ली-गुडग़ांव-फरीदाबाद रोड शामिल हैं। पहले तीन सड़कों पर भारी वाहन जयपुर और राजस्थान के दूसरे जिले से आते हैं।


गुडग़ांव होते हुए दिल्ली सीमा में प्रवेश करते हैं। इसके अलावा फरीदाबाद रोड पर पत्थर के खनन और आवागमन के साथ यहां से ट्रक गुजरते हैं। इन सड़कों पर चलने वाले सैंकड़ों ट्रक भी प्रदूषण में इजाफा करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed