मरीजों पर भारी पड़ रही अस्पताल की लेटलतीफी
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फरीदाबाद जिला सिविल अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा के लिए मरीजों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। तीन माह से तैयार डायलिसिस सेंटर को उद्घाटन का इंतजार है। अब तक सेंटर के बाहर अंडर प्रोसेस का बोर्ड लटका हुआ है जबकि अस्पताल की दूसरी मंजिल पर यह सेंटर बनकर तैयार हो चुका है। मरीजों को डायलिसिस के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला सिविल अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत डायलिसिस सेंटर बनाया गया है, ताकि कम खर्च पर जरूरतमंदों को डायलिसिस की सुविधा मिल सके। पिछले महीने दावा किया जा रहा था कि दो सप्ताह में इसकी शुरुआत कर दी जाएगी लेकिन जुलाई का महीना बीतने को है, अब तक डायलिसिस सेंटर शुरू नहीं हो सका है।
बताया जा रहा है कि इसके उद्घाटन के लिए सीएमओ से समय मांगा गया है लेकिन सीएमओ के पास इतना भी समय नहीं है कि इसका फीता काट सकें। अप्रैल माह में डायलिसिस सेंटर बनकर तैयार हो चुका है।
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल में बनाए गए डायलिसिस यूनिट भले ही जिले के जरूरतमंद लोगों के लिए न खुला हो, लेकिन पीपीपी मॉडल के तहत जिस संस्था ने इसमें भागीदारी की है वो दिल्ली के मरीजों का डायलिसिस यहां करा रही है। आखिरकार क्या वजह है कि जिले के लोगों को इसकी सुविधा नहीं दी जा रही है। इस संबंध में डायलिसिस सेंटर में कार्यरत एक कर्मचारी से पूछा गया तो उसने जवाब दिया कि जब सीएमओ साहब चाहेंगे तब इसे स्थानीय लोगों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
क्या मिलेगी सुविधा
बीके सिविल अस्पताल के दूसरे तल पर डायलिसिस यूनिट में आठ मशीनें लगाई गई हैं। सुबह सात बजे से रात 9 बजे तक तीन शिफ्ट में डायलिसिस की सुविधा दिए जाने की योजना है। सिविल अस्पताल में बनाए गए इस यूनिट में 943 रुपए में डायलिसिस की जाएगी। वहीं, बीपीएल कार्ड धारकों को इसकी निशुल्क सुविधा दी जानी है। सरकारी अस्पताल में सुविधा न मिलने की वजह से मरीजों को निजी अस्पताल में दो से ढाई हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला उपायुक्त समीरपाल सरो को डायलसिस सेंटर शुरू करवाने के लिए फाइल दी जा चुकी है। जैसे ही फाइल वहां से पास होती है डायलसिस सेंटर को मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा।-डॉ. गुलशन अरोड़ा, सीएमओ