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Delhi NCR News: डीएचसीबीए ने एक्स पोस्ट पर एफआईआर वापस लेने की मांग की
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शामली समेत उत्तर प्रदेश के संस्करणों के लिए भी महत्वपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक से अपील की है कि शामली पुलिस द्वारा दिल्ली के वकील सैयद कैफ हसन पर दर्ज की गई एफआईआर को तुरंत वापस लें या बंद करें। यह एफआईआर हसन द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक हालिया मामले पर एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किए गए संदेश पर दर्ज हुई है। डीएचसीबीए ने 29 सितंबर को यूपी डीजीपी राजीव कृष्णा को लिखे पत्र में कहा कि हसन का पोस्ट अदालती कार्यवाही का अपडेट था और उस समय लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई वैध न्यायिक रिपोर्टिंग पर ठंडा असर डाल सकती है।
मामला आयुष मलिक से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में शामली के युवक आयुष मलिक को उनके परिवार की अवैध हिरासत से मुक्त कराने का आदेश दिया था। मलिक ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया था, जिसके बाद परिवार ने उन्हें घर में बंदकर रखा था। हसन ने एक्स पर लिखा था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में यूपी पुलिस को फटकार लगाई है। शामली पुलिस ने इस दावे से इनकार करते हुए हसन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में कहा गया है कि अदालत ने पुलिस से कोई जवाबी हलफनामा नहीं मांगा था और यह पिता-पुत्र के बीच विवाद था। पुलिस के साइबर सेल ने एक्स कॉर्प को नोटिस भेजकर हसन के अकाउंट को फर्जी बताया और आईपी एड्रेस आदि मांगे। हसन ने एक्स पर जवाब देते हुए कहा, मैं उसी अदालत का वकील हूं। जो लोग वास्तव में कुछ तोड़-मरोड़ रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। लेकिन मुझे डराएं नहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक से अपील की है कि शामली पुलिस द्वारा दिल्ली के वकील सैयद कैफ हसन पर दर्ज की गई एफआईआर को तुरंत वापस लें या बंद करें। यह एफआईआर हसन द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक हालिया मामले पर एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किए गए संदेश पर दर्ज हुई है। डीएचसीबीए ने 29 सितंबर को यूपी डीजीपी राजीव कृष्णा को लिखे पत्र में कहा कि हसन का पोस्ट अदालती कार्यवाही का अपडेट था और उस समय लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई वैध न्यायिक रिपोर्टिंग पर ठंडा असर डाल सकती है।
मामला आयुष मलिक से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में शामली के युवक आयुष मलिक को उनके परिवार की अवैध हिरासत से मुक्त कराने का आदेश दिया था। मलिक ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया था, जिसके बाद परिवार ने उन्हें घर में बंदकर रखा था। हसन ने एक्स पर लिखा था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में यूपी पुलिस को फटकार लगाई है। शामली पुलिस ने इस दावे से इनकार करते हुए हसन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में कहा गया है कि अदालत ने पुलिस से कोई जवाबी हलफनामा नहीं मांगा था और यह पिता-पुत्र के बीच विवाद था। पुलिस के साइबर सेल ने एक्स कॉर्प को नोटिस भेजकर हसन के अकाउंट को फर्जी बताया और आईपी एड्रेस आदि मांगे। हसन ने एक्स पर जवाब देते हुए कहा, मैं उसी अदालत का वकील हूं। जो लोग वास्तव में कुछ तोड़-मरोड़ रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। लेकिन मुझे डराएं नहीं।
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