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सीएम के निर्देश के बाद भी लेट-लतीफ ही है प्रशासन
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 03 Nov 2014 07:26 PM IST
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पिछली सरकार में सुस्त और निरंकुश हो चुके नौकरशाहों ने भाजपा के सत्ता पर काबिज होने के बाद भी अपना रवैया नहीं सुधारा है।
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दो दिन पहले हरियाणा दिवस पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा समय से आने की नसीहत देने के बाद भी जिले के आला अधिकारियों ने सुबह 9:00 बजे कार्यालय आना जरूरी नहीं समझा।
सीएम की मीटिंग हुई और अधिकारियों ने मान लिया कि उनका काम हो गया। अब कौन आएगा कार्यालय में चेक करने। इसीलिए सोमवार सुबह अमर उजाला ने सीएम के आदेश को अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले तवज्जो को जानना चाहा।
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जब हम लघु सचिवालय पहुंचे तो तय सरकारी समय पर एक भी बड़ा अफसर अपनी सीट पर मौजूद नहीं था। कहने को कोई अधिकारी यह कह सकता है कि वह कहीं गया था, लेकिन सीएम ने तो सुबह अपने कार्यालय में हर हालत में बैठने को कहा है। फिर कहां हुआ नए सीएम के आदेश का पालन। अधिकारियों की लेटलतीफी पर पेश है संवाददाता ओम प्रकाश की रिपोर्ट
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जिला उपायुक्त कार्यालय
जिले के सबसे बड़े अफसर डीसी विजय सिंह दहिया सोमवार को समय पर पहुंचकर सभी विभागों के लिए आदर्श स्थापित कर सकते थे लेकिन उनकी सीट तो खाली थी। हमने 9:20 बजे तक उनका इंतजार किया और फिर आगे बढ़े।
एडीसी कार्यालय
अतिरिक्त जिला उपायुक्त 9:25 बजे तक कार्यालय में नहीं थे। यदि डीसी न हों तो उनका कामकाज एडीसी देखता है। लेकिन जब डीसी ही नहीं तो नीचे वाले भला क्यों पहुंचेंगे समय पर।
एसडीएम
फरीदाबाद के एसडीएम महावीर प्रसाद सुबह 9:10 बजे तक अपने कार्यालय नहीं पहुंचे थे। गेट भी बंद था। जबकि एसडीएम कार्यालय काफी महत्वपूर्ण होता है।
नायब तहसीलदार
सुबह 9:17 बजे तक नायब तहसीलदार का पता नहीं था। जबकि बाहर रजिस्ट्री करवाने वाले घूम रहे थे। जब तहसील जैसे कार्यालय में यह हाल हो तो और जगहों की क्या स्थिति होगी, खुद अंदाजा लगा लीजिए।
तहसीलदार
फरीदाबाद जोन के तहसीलदार राजेंद्र गर्ग का कमरा भी 9:15 बजे तक उनका इंतजार कर रहा था। कुर्सियां खाली पड़ी थीं। 9:40 बजे तक तहसील वेलफेयर अफसर के कार्यालय में ताला लटक रहा था।
चुनाव कार्यालय
यहां तो हद ही हो गई। 9:45 बजे तक चुनाव कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ था। शायद अधिकारी चुनाव के बाद आराम फरमा रहे हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस
9:42 बज चुके थे लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट गौरव अंतिल अभी तक कार्यालय में नहीं थे। जब डीसी महोदय नहीं थे तो भला सीटीएम आकर क्या करेंगे।
ई-दिशा केंद्र
इस केंद्र में जनता से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण काम होते हैं। यहां पर ड्राइविंग लाइसेंस, रिहायशी, आय, जाति प्रमाण पत्र एवं आधार कार्ड बनाने जैसे काम होते हैं। इसके बावजूद यहां 9:27 बजे तक ताला लगा हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील, पद्मश्री डॉ. ब्रह्मदत्त ने कहा कि हरियाणा में काफी सारे नौकरशाह बेलगाम हो चुके हैं। वह जनता और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। सुबह 9:00 बजे कार्यालय आने का सरकारी टाइम है। एक नवंबर को मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर खुद मीटिंग में आदेश देकर गए हैं। इसके बावजूद रवैया न सुधरना यह दर्शाता है कि अधिकारियों को किसी की परवाह नहीं है। सरकार ऐसे अधिकारियों को चार्जशीट देकर जवाब मांगे। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाए तब जनता में अच्छा संदेश जाएगा। जो भी अधिकारी बाहर जाए वह नोटिस तो लगाए कि कहां गया है, ताकि जनता परेशान न हो।
वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जहाजरानी राज्य मंत्री, कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि एक साथ सभी अधिकारियों का 9:00 बजे न आना काफी गंभीर मामला है। इस पर जवाब तलब किया जाएगा। जहां तक जिला उपायुक्त का मसला है तो मुझे पता चला है कि वह चंडीगढ़ गए हुए हैं।