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एमसीडी का होगा कायाकल्प: दिल्ली को स्वच्छ-हरित बनाना है प्राथमिकता, डिप्टी मेयर ने कई मुद्दों पर खुलकर की बात
Tue, 29 Apr 2025 07:53 AM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 29 Apr 2025 07:53 AM IST
सार
एमसीडी के डिप्टी मेयर जयभगवान यादव का एक विशेष साक्षात्कार हुआ। साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाएंगे। डिप्टी मेयर ने सफाई, आर्थिक सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों के मुद्दों पर खुलकर बातचीत की।
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एमसीडी मुख्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एमसीडी के डिप्टी मेयर जयभगवान यादव ने एक विशेष साक्षात्कार में एमसीडी के सामने मौजूद चुनौतियों और अपनी प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एमसीडी का कायाकल्प करना भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका स्पष्ट संदेश है कि एमसीडी का पुनरुद्धार, स्वच्छता, आर्थिक मजबूती और ग्रामीण विकास उनकी कार्ययोजना के मुख्य स्तंभ होंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नागरिकों को जल्द ही सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देगा।
प्रस्तुत हैं विनोद डबास की उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
एमसीडी का सबसे पहला और सबसे जरूरी काम कौनसा है? उस कार्य को करने के लिए आपकी क्या योजना है?
दिल्ली के नागरिकों की सबसे बड़ी शिकायत गंदगी और अव्यवस्थित कूड़ा प्रबंधन को लेकर है। हमारी पहली प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना होगी। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाया जाएगा, रीसाइकलिंग यूनिट्स को बढ़ावा दिया जाएगा और लैंडफिल साइटों का समाधान निकाला जाएगा। अगले कुछ महीनों में दिल्ली की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव नजर आएगा।
एमसीडी की मौजूदा सबसे बड़ी चुनौतियां आपके हिसाब से क्या हैं और उन्हें सुधारने के लिए प्राथमिकताएं क्या हैं?
एमसीडी की आर्थिक स्थिति कमजोर है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। हमारा लक्ष्य एमसीडी को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए संपत्ति कर संग्रह को प्रभावी बनाया जाएगा, नए राजस्व के स्रोत विकसित किए जाएंगे और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण किया जाएगा। पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाकर एमसीडी को आर्थिक मजबूती प्रदान करना हमारी प्राथमिकता रहेगी।
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प्रदूषण को दूर करने के लिए आपकी क्या योजना है?
प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हरित क्षेत्र बढ़ाना बेहद जरूरी है। हमारी योजना है कि दिल्ली में नए पार्क और ग्रीन बेल्ट्स विकसित की जाएं। मौजूदा पार्कों को भी बेहतर किया जाएगा। पौधारोपण अभियान को गति दी जाएगी।
आप ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और गांवों में शहरी क्षेत्र की तरह भवन उप नियम लागू करने से ग्रामीण नाराज हैं, इस दिशा में आप क्या कदम उठाएंगे?
गांवों की वास्तविकता को समझे बिना शहरी भवन उप नियम लागू करना उचित नहीं है। इस कारण आज तक एक भी नक्शा पास नहीं हो पाया है। हम दिल्ली सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि गांवों के लिए अलग और व्यावहारिक भवन उप नियम बनाए जाएं।
ग्रामीणों को संपत्ति कर में मिलने वाली छूट कम कर दी गई है, क्या दोबारा छूट बढ़ेगी?
ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। हम न केवल पहले जैसी छूट बहाल कराने का प्रयास करेंगे, बल्कि अतिरिक्त राहत दिलाने के लिए भी कदम उठाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक दबाव कम किया जा सके और ग्रामीणों को न्याय मिल सके।
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प्रस्तुत हैं विनोद डबास की उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
एमसीडी का सबसे पहला और सबसे जरूरी काम कौनसा है? उस कार्य को करने के लिए आपकी क्या योजना है?
दिल्ली के नागरिकों की सबसे बड़ी शिकायत गंदगी और अव्यवस्थित कूड़ा प्रबंधन को लेकर है। हमारी पहली प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना होगी। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाया जाएगा, रीसाइकलिंग यूनिट्स को बढ़ावा दिया जाएगा और लैंडफिल साइटों का समाधान निकाला जाएगा। अगले कुछ महीनों में दिल्ली की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव नजर आएगा।
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एमसीडी की मौजूदा सबसे बड़ी चुनौतियां आपके हिसाब से क्या हैं और उन्हें सुधारने के लिए प्राथमिकताएं क्या हैं?
एमसीडी की आर्थिक स्थिति कमजोर है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। हमारा लक्ष्य एमसीडी को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए संपत्ति कर संग्रह को प्रभावी बनाया जाएगा, नए राजस्व के स्रोत विकसित किए जाएंगे और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण किया जाएगा। पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाकर एमसीडी को आर्थिक मजबूती प्रदान करना हमारी प्राथमिकता रहेगी।
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प्रदूषण को दूर करने के लिए आपकी क्या योजना है?
प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हरित क्षेत्र बढ़ाना बेहद जरूरी है। हमारी योजना है कि दिल्ली में नए पार्क और ग्रीन बेल्ट्स विकसित की जाएं। मौजूदा पार्कों को भी बेहतर किया जाएगा। पौधारोपण अभियान को गति दी जाएगी।
आप ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और गांवों में शहरी क्षेत्र की तरह भवन उप नियम लागू करने से ग्रामीण नाराज हैं, इस दिशा में आप क्या कदम उठाएंगे?
गांवों की वास्तविकता को समझे बिना शहरी भवन उप नियम लागू करना उचित नहीं है। इस कारण आज तक एक भी नक्शा पास नहीं हो पाया है। हम दिल्ली सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि गांवों के लिए अलग और व्यावहारिक भवन उप नियम बनाए जाएं।
ग्रामीणों को संपत्ति कर में मिलने वाली छूट कम कर दी गई है, क्या दोबारा छूट बढ़ेगी?
ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। हम न केवल पहले जैसी छूट बहाल कराने का प्रयास करेंगे, बल्कि अतिरिक्त राहत दिलाने के लिए भी कदम उठाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक दबाव कम किया जा सके और ग्रामीणों को न्याय मिल सके।