डेंगू-चिकनगुनिया के सही आंकड़े न बताना पड़ा भारी, अधिकारियों को लगी फटकार
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारी डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया के आंकड़ों में काफी हेराफेर कर रहे हैं। जलजनित बीमारियों के सही आंकड़े न बताना बुधवार को उन्हें महंगा पड़ गया।
स्थायी समिति की बैठक में विपक्ष के ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के पार्षदों ने कड़ी फटकार लगाई। पार्षदों ने कहा कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या और निगम के आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर है।
स्थायी समिति की बैठक में नेता प्रतिपक्ष मुकेश गोयल ने जलजनित बीमारियों के प्रकोप पर चर्चा कराने के लिए अल्पकालिक प्रश्न लगाया था। उनके प्रश्नों के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने चौकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि गत 17 सितंबर तक मलेरिया के तीन मरीज, डेंगू के 134 और चिकनगुनिया के 244 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए।
अधिकारियों पर वस्तुस्थिति छुपाने का आरोप
वस्तुस्थिति छुपाने का आरोप
अधिकारियों के आंकड़े देखकर गोयल के साथ-साथ सदन के नेता वीपी पांडेय ने रोष जताया। गोयल ने आरोप लगाया कि अधिकारी वस्तुस्थिति को छुपा रहे हैं।
अस्पतालों में एक-एक बिस्तर पर दो से तीन मरीजों को भर्ती कर रखा है और वे कह रहे हैं कि बहुत ही कम मरीज सामने आए हैं। पांडेय ने कहा कि निगम के हिन्दूराव और कस्तूरबा गांधी अस्पताल में ही चिकनगुनिया के 205 मरीज भर्ती हैं और चिकनगुनिया के करीब 500 मरीज मामले संदिग्ध हैं।
डेंगू के 99 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है और 2000 से अधिक संदिग्ध हैं। इस मौके पर पार्षदों ने अधिकारियों को जलजनित बीमारियों की रोकथाम का काम मुश्तैदी से चलाने को कहा।