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अदालती कामकाज पर पड़ा नोटबंदी का असर, लंबी तारीख ले रहे वादी-प्रतिवादी

Thu, 17 Nov 2016 12:06 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, फरीदाबाद
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 17 Nov 2016 12:06 AM IST
सार

स्टांप बिक्री 40 फीसदी तक गिरी, बड़े स्टांप खरीदने वाले नहीं आ रहे
-स्टांप बिक्री 40 फीसदी तकन गिरी, बड़े स्टांप खरीदने वाले नहीं आ रहे 
-चहल पहल घटी, कचेहरी में वकील और स्टांप वेंडर ही आ रहे नजर  

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demonetization is effecting court process in faridabad

विस्तार

मेवला महाराजपुर से आए आशीष मंगला नाम के व्यक्ति ने बताया कि उसका भाई के साथ जमीन के  बंटवारे का मुकदमा चल रहा है। बुधवार को सुनवाई थी, वकील से कह कर अप्रैल 2017 में सुनवाई की तारीख ली है। आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कोर्ट कचेहरी का कामधाम कम हो गया है।
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हालात यह हैं कि वादी और प्रतिवादी दोनों ही वकील के जरिए मुकदमों की लंबी तारीख ले रहे हैं। न्यायपालिका के जरिए होने वाली खरीद फरोख्त भी लगभग ठप पड़ी है यही वजह है कि स्टांप बिक्री 40 फीसदी से ज्यादा घट चुकी है।
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हमेशा भीड़ भाड़ वाले कचहरी परिसर में वकीलों के अलावा कुछ ही लोग नजर आ रहे हैं। नोटों की तंगी का असर अदालत परिसर पर कितना पड़ा है। बातचीत के आधार पर यही जानने की कोशिश की गई। पेश है रिपोर्ट:-
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सुनवाई टालने पर ज्यादा जोर

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एडवोकेट जीके बुद्धिराजा के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से न्यायालय का काम रुका तो नहीं है लेकहिन केसों की सुनवाई में तीस से चालीस फीसदी कमी हो गई है। बहस या सुनवाई वाले ज्यादातर क्लाइंट सुनवाई टलवाने के लिए कह रहे हैं।

बड़े नोटों के चलन से बाहर होने की वजह से आम आदमी फिलहाल बैंकों की लाइन में लग कर घरेलू जरूरतें पूरी करने के प्रयास में लगा है। ऐसे में अधिकतर क्लाइंट अदालती काम को प्राथमिकता में नहीं रख रहे हैं। 

जुर्माने में 30 फीसदी गिरावट
डालसा के पैनलिस्ट एडवोकेट रविंदर गुप्ता के मुताबिक चालान और जुर्माना भरने के मामलों में तीस फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इसकी वजह वह बड़े नोटों का चलन से बाहर होना मानते हैं। उन्होंने बताया कि जुर्माना या चालान वसूलने के लिए अदालत में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या एनईएफटी का प्रावधान नहीं है। क्लाइंट को भुगतान नकद में ही करना होता है ऐसे में इस तरह के केस भी टाले जा रहे हैं।

स्टांप बिक्री में 40 फीसदी कमी
स्टांप वेंडर इंदरजीत शर्मा उर्फ पप्पू के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से स्टांप बिक्री में चालीस फीसदी तक गिरावट आ गई है। पहले दिन भर में शपथपत्र के लिए 20-25 स्टांप बिक जाते थे अब दस बिकना मुश्किल हो जाता है। जमीन, कार, वाहन आदि बड़ी चीजों की खरीदारी तो बिलकुल ही बंद है इसलिए बड़े स्टांप की मांग लगभग खत्म सी है। 

पुलिस का काम भी प्रभावित
सेंट्रल थाने में तैनात एएसआई राजकुमार ने बताया कि बड़े नोटों के चलन से बाहर होने से पुलिस का काम प्रभावित नहीं हुआ है। पुलिस चालान का जो लोग नकद भुगतान कर रहे हैं उनसे धन लेकर रसीद दी जा रही है, जो नहीं दे रहे हैं वह कोर्ट के जरिए जमा करेंगे।

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