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नोट बंदी का असर : बच्चों को पालने के लिए काम तो करना ही पड़ेगा

Tue, 29 Nov 2016 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Tue, 29 Nov 2016 10:18 AM IST
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demonetization effect on labours in noida
- फोटो : अमर उजाला

दिहाड़ी मजदूरी करने वाले किशन सिंह को एक दिन के 500 रुपये दिहाड़ी पुराने नोट से मिलती है। बाजार में उसे चलाने के लिए 25 फीसदी कमीशन देना पड़ता है। यानी 500 का नोट 400 रुपये में ही चलता है।

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फिर भी हिम्मत बांधते हुए कहते हैं कि बच्चे पालना है तो काम करना ही पड़ेगा। नोट बंदी की ऐसी मार सभी मजदूरों पर पड़ रही है। हालांकि समय बीतने के बाद ज्यादातर मजदूर अब पहले ही बता देते हैं कि पुराना नोट नहीं चलेगा।
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मालूम हो कि शहर में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर रहते हैं, जो निर्माणाधीन साइट व अन्य जगह काम करते हैं। पांच सौ और हजार रुपये के पुराने नोट बंद होने से इन लोगों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है। जो लोग काम कराने के लिए ले जाते हैं, वे पांच सौ रुपये का पुराना नोट थमा देते हैं।
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मजदूर चाहकर भी मना नहीं कर पाता, क्योंकि उसे घर का खर्च चलाना है। ज्यादातर मजदूरों का बैंक खाता नहीं है, इसलिए पुराने नोट जमा भी नहीं कर सकते। मार्केट में सामान खरीदने जाते हैं तो दुकानदार पांच सौ का नोट चार सौ रुपये में चलाता है।


पांच सौ का नोट चार सौ में चलाना पड़ रहा 
कल गैस लेने गया था। पांच सौ रुपये का पुराना नोट चार सौ में चलाना पड़ा। मजबूरी यह है कि बच्चों को भूखा नहीं रख सकता। अब जो लोग काम कराने के लिए आते हैं, उनसे पहले पूछ लेता हूं कि नया नोट मिलेगा की नहीं। नोटबंदी के बाद पैसे की बहुत ज्यादा किल्लत पैदा हो गई है। - किशन सिंह, मजदूर । 

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