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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Demanding regime change in a democracy is not wrong... Neha BoraASG says, Governance will change through votes, not through hooligans

Delhi NCR News: लोकतंत्र में रिजीम चेंज की मांग गलत नहीं- नेहा बोरा एएसजी बोले- शासन वोट से बदलेगा लंपटों से नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 02:10 AM IST
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गौरव बाजपेई
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नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि लोकतंत्र में शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) की मांग करने में कोई गलत बात नहीं है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कुछ बोरा की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) संबंधी बयान शामिल था। इस पर बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, लोकतंत्र में शासन परिवर्तन में कोई गलत बात नहीं है। इस पर एएसजी ने कहा शासन परिवर्तन वोट से होता है, न कि नई दिल्ली के तंत्र में घुसे लंपट तत्वों से।


ऐसे बढ़ी सुनवाई
याचिकाकर्ता के दावे

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामला बहुत संकीर्ण है और बीएनएसएस की धारा 126 तथा 130 के तहत जारी नोटिस से संबंधित है। उन्होंने बताया कि नेहा बोरा एआईएसए की नेता हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। देश में समय-समय पर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन उनकी मुवक्किल की ओर से कभी हिंसा के लिए उकसाया नहीं गया। सभी प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। उन्होंने सुधारों की मांग की है और समय-समय पर ट्वीट करके लोगों से जुड़ने की अपील की है। 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। 16 अक्टूबर को दोपहर 4 बजे एक पोस्ट डाली गई, जो जंतर मंतर के अचानक डिनोटिफाई किए जाने के विरोध में थी। इस पोस्ट में मंडी हाउस पर बैठक का वादा किया गया था। इसमें हिंसा भड़काने, कानून तोड़ने, शांति भंग करने या कोई अपराध करने के लिए भीड़ जुटाने का कोई जिक्र नहीं था।गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कलंदरा में धारा 163 का जिक्र नहीं था, लेकिन लाउडस्पीकर से कहा जा रहा था कि धारा 163 लागू है। इसमें सीपी का जिक्र और बिना अनुमति राष्ट्रीय ध्वज फहराने की बात कही गई है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती।
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अदालत के सवाल और टिप्पणियां
न्यायमूर्ति प्रसाद ने पूछा कि क्या उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत वही काम कर रहा है जो मजिस्ट्रेट को धारा 135(3) के तहत करना चाहिए। अदालत ने कहा कि नोटिस के अंतिम तीन शब्दों के कारण उसका उद्देश्य यह प्रतीत होता है कि जांच के दौरान मुचलका न दिया जाए। अदालत ने सुझाव दिया कि क्या बेहतर नहीं होगा कि धारा 135 की जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए और फिर अदालत का रुख किया जाए। हालांकि अदालत ने जोड़ा कि व्यक्ति को पहले से ही “बुरा लड़का” करार देकर अच्छे व्यवहार का वादा करवाया जा रहा है। यह कलंक अनुच्छेद 21 से जुड़ा है। मुचलका देना जांच लंबित रहने तक निलंबन जैसा है। न्यायमूर्ति ने कहा कि व्यक्तिपरक संतुष्टि में अदालत तभी दखल दे सकती है जब वह असामान्य हो। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वे याचिका जारी रखना चाहते हैं या शो कॉज नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना चाहते हैं।
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एएसजी ने रखा पुलिस का पक्ष
एएसजी चेतन शर्मा ने बीएनएसएस प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 126 और 130 एक साथ चलती हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। शांति भंग की संभावना होने पर ये धाराएं लागू होती हैं। तकनीकी विभाजन सार्वजनिक शांति के सार को छीन लेगा। मजिस्ट्रेट ने कलंदरा का निरीक्षण किया और उसके बाद नोटिस जारी किया। एएसजी ने दावा किया कि मंडी हाउस का आह्वान केवल था और सीपी नहीं तथा धारा 163 लागू नहीं थी, यह गलत है। धारा 163 लागू थी। पुलिस संख्या में कम थी। वे भागीं और सीपी की ओर दौड़ीं। अदालत ने कहा कि सभी दस्तावेज याचिकाकर्ता को दिए जाएंगे, जिस पर एएसजी ने सहमति जताई।
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