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Delhi NCR News: एसओएल-एनसीवेब छात्रों के मुद्दों को डूसू चुनाव में जगह देने की मांग
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नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) और नॉन-कॉलेजिएट विमेंस एजुकेशन बोर्ड (एनसीवेब) के छात्रों की समस्याओं को लेकर स्वाभिमान मार्च निकाला। संगठन ने आरोप लगाया कि डूसू चुनाव लड़ रहे किसी भी छात्र संगठन के घोषणापत्र में एसओएल और एनसीवेब के करीब छह लाख छात्रों की समस्याओं को जगह नहीं दी गई है।
केवाईएस के मुताबिक, इन छात्रों के पास डूसू चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं है, इसलिए उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता। एसओएल और एनसीवेब में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र सरकारी स्कूलों और वंचित वर्गों से आते हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि इन छात्रों को पर्याप्त कक्षाएं, पुस्तकालय की सुविधा, अच्छी अध्ययन सामग्री और सभी मार्गों पर बस पास जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। एसओएल की अध्ययन सामग्री में कई गलतियां होने का आरोप भी लगाया गया।
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केवाईएस ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, इन सिफारिशों के कारण एसओएल जैसे अनौपचारिक माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों को छात्र संघ चुनाव में भाग लेने से बाहर रखा गया है। छात्र संगठनों को इन छात्रों की समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाना चाहिए।
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केवाईएस के मुताबिक, इन छात्रों के पास डूसू चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं है, इसलिए उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता। एसओएल और एनसीवेब में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र सरकारी स्कूलों और वंचित वर्गों से आते हैं।
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संगठन ने आरोप लगाया कि इन छात्रों को पर्याप्त कक्षाएं, पुस्तकालय की सुविधा, अच्छी अध्ययन सामग्री और सभी मार्गों पर बस पास जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। एसओएल की अध्ययन सामग्री में कई गलतियां होने का आरोप भी लगाया गया।
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केवाईएस ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, इन सिफारिशों के कारण एसओएल जैसे अनौपचारिक माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों को छात्र संघ चुनाव में भाग लेने से बाहर रखा गया है। छात्र संगठनों को इन छात्रों की समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाना चाहिए।