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दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन पद पर नियुक्ति न करने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
Thu, 30 Jul 2020 09:57 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Thu, 30 Jul 2020 09:57 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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हाईकोर्ट ने उस अर्जी पर केंद्र, दिल्ली सरकार तथा उपराज्यपाल कार्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है जिसमें कहा गया है कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की संवैधानिकता से जुड़े मुद्दे का निपटारा होने तक इसके चेयरमैन पर किसी की नियुक्ति न की जाए। आयोग के चेयरमैन का पद कुछ दिन पहले ही खाली हुआ है लेकिन संवैधानिकता का मुद्दा हाईकोर्ट में लंबित है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने अर्जी पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय कर दी। उसी दिन मूल याचिका पर भी सुनवाई होनी है। खंडपीठ ने इन पक्षों को अगली तारीख से पहले मूल याचिका पर भी जवाब देने का निर्देश दिया है।
पेश अर्जी सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम गहलौत ने दायर की है। गहलौत ने ही मूल याचिका दायर आयोग के अधिनियम तथा इसके गठन को चुनौती दे रखी है। गहलौत के वकील धनंजय जैन ने कहा कि चूंकि आयोग की संवैधानिकता के मुद्दे का निपटारा नहीं हुआ है इसलिए किसी की भी चेयरमैन पद पर नियुक्ति न करने का निर्देश दिया जाए।
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पूर्व चेयरमैन जफरूल इस्लाम खान के विवादित मीडिया पोस्ट से उठे विवाद के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी।
याची का दावा है कि दिल्ली विधानसभा के पास डीएमसी अधिनियम को लागू करने का अधिकार नहीं था लेकिन फिर भी ऐसा किया गया। इसलिए असंवैधानिकता था। लिहाजा इस अधिनियम को खारिज किया जाए। यह अधिनियम असंवैधानिक है इसलिए इसके अंतर्गत की गई सभी नियुक्तियां भी गैर कानूनी हैं।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने अर्जी पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय कर दी। उसी दिन मूल याचिका पर भी सुनवाई होनी है। खंडपीठ ने इन पक्षों को अगली तारीख से पहले मूल याचिका पर भी जवाब देने का निर्देश दिया है।
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पेश अर्जी सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम गहलौत ने दायर की है। गहलौत ने ही मूल याचिका दायर आयोग के अधिनियम तथा इसके गठन को चुनौती दे रखी है। गहलौत के वकील धनंजय जैन ने कहा कि चूंकि आयोग की संवैधानिकता के मुद्दे का निपटारा नहीं हुआ है इसलिए किसी की भी चेयरमैन पद पर नियुक्ति न करने का निर्देश दिया जाए।
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पूर्व चेयरमैन जफरूल इस्लाम खान के विवादित मीडिया पोस्ट से उठे विवाद के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी।
याची का दावा है कि दिल्ली विधानसभा के पास डीएमसी अधिनियम को लागू करने का अधिकार नहीं था लेकिन फिर भी ऐसा किया गया। इसलिए असंवैधानिकता था। लिहाजा इस अधिनियम को खारिज किया जाए। यह अधिनियम असंवैधानिक है इसलिए इसके अंतर्गत की गई सभी नियुक्तियां भी गैर कानूनी हैं।