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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi's air is poor; the NCR also faces a breathing crisis, with no relief in sight even for the weekend.

Delhi NCR News: दिल्ली की हवा खराब, एनसीआर में भी सांसों पर संकट, वीकेंड पर भी राहत नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 02:11 AM IST
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दिल्ली की हवा खराब, एनसीआर में भी सांसों पर संकट, वीकेंड पर भी राहत नहीं----दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ‘खराब’ श्रेणी में, पीएम 2.5 और पीएम 10 बने प्रमुख प्रदूषक, लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से ज्यादातर लोगों को सांस लेने में हो सकती है परेशानी
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नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप लागू होने के बावजूद हवाएं खराब रहीं। बृहस्पतिवार दिल्ली समेत नजदीकी के शहरों में भी लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ीं। राजधानी का एक्यूआई 223 दर्ज किया गया। वहीं, नोएडा में यह आंकड़ा 242 और गाजियाबाद में 221 रहा। उधर, दम घोटती हवाओं से फिलहाल राहत मिलने के उम्मीद भी नहीं दिख रही है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने अंदेशा जताया है कि मौसमी दशाएं प्रतिकूल होने से 25 अक्तूबर तक हालात में बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है। इसके बाद मामूली राहत मिल सकती है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, दिल्ली में 24 घंटों का औसत एक्यूआई 223 रहा। इसमें पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा सबसे ज्यादा रही। नोएडा और गाजियाबाद में भी यही प्रदूषक प्रभावी दिखे। धूल के यह महीन कण हवा के साथ सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। खासकर पीएम 2.5 के बेहद छोटे कण सांस की नलियों से होते हुए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
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वीकेंड तक हवा चलती रहेगी, लेकिन प्रदूषण से राहत की गारंटी नहीं
हवाएं खराब होने की बड़ी वजह मौसमी दशाओं का प्रतिकूल होना है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, 23 अक्तूबर को दोपहर के समय उत्तर-पश्चिमी दिशा से हवा की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। जबकि वेंटिलेशन इंडेक्स 19,500 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने का अनुमान है। बीते चार दिनों में यह सबसे अधिक है।
इसके बावजूद मौसम विभाग ने इन दिनों हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहने का अनुमान जताया है। वेंटिलेशन इंडेक्स यह समझने में मदद करता है कि वातावरण में मौजूद प्रदूषक कितनी आसानी से फैल सकते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, जब यह सूचकांक 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे हो और औसत हवा की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहे, तो प्रदूषकों के फैलाव के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल होती हैं।
यही स्थिति 24 और 25 अक्तूबर को बनने की आशंका है। 24 अक्तूबर को वेंटिलेशन इंडेक्स 4,000 और 25 अक्तूबर को घटकर 2,500 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने का अनुमान है। इन दोनों दिनों में हवा की गुणवत्ता खराब रहने का पूर्वानुमान है। 25 अक्तूबर को दोपहर में हवा की गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है, लेकिन केवल हवा की अधिकतम गति से प्रदूषण में तत्काल सुधार नहीं होगा।
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दिन में हल्की गर्मी, रात का तापमान सामान्य से ऊपर

मौसम विभाग के अनुसार, 23 अक्तूबर को अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 24 और 25 अक्तूबर को अधिकतम तापमान बढ़कर 32 से 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। 24 अक्तूबर को आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 24 अक्तूबर को हवा की रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव की क्षमता में गिरावट का संकेत है। 25 अक्तूबर को भी वेंटिलेशन इंडेक्स कम रहने का अनुमान है। ऐसे में अगले कुछ दिन दिल्लीवासियों के लिए प्रदूषण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण बने रह सकते हैं।
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देश के दूसरे शहरों में भी प्रदूषण की चिंता

सीपीसीबी के मुताबिक, बृहस्पतिवार दिल्ली अकेला ऐसा शहर नहीं रहा, जहां हवा खराब श्रेणी में पहुंची है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक्यूआई 281, बागपत में 282 और हापुड़ में 328 दर्ज किया गया। हापुड़ का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा। वहीं, हरियाणा के मानेसर में एक्यूआई 271, करनाल में 242 और राजस्थान के भिवाड़ी में 213 दर्ज किया गया।


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हवा में बढ़ते प्रदूषण का शरीर पर असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि एक्यूआई का स्तर सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा है। 201 से 300 के बीच खराब एक्यूआई के संपर्क में देर तक रहने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। पहले से फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए प्रदूषण का असर अधिक चिंताजनक हो सकता है। फिर भी, एक्यूआई से किसी व्यक्ति की सेहत पर होने वाला वास्तविक असर सीधे तय नहीं किया जा सकता। यह हवा में प्रदूषण के स्तर को समझने का संकेतक है।

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एक नजर में
दिल्ली: 223 -खराब
नोएडा: 242 - खराब

गाजियाबाद: 221 - खराब

ग्रेटर नोएडा: 219 - खराब

गुरुग्राम: 193 - मध्यम

फरीदाबाद: 117 - मध्यम

हापुड़: 328 - बहुत खराब
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