{"_id":"5f0d2d6d6dba4956765d6aab","slug":"delhi-violence-update-accused-shamim-granted-bail-by-delhi-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली हिंसा: आरोपी शमीम को अदालत ने दी जमानत, पुलिस की कार्रवाई पर उठाया सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली हिंसा: आरोपी शमीम को अदालत ने दी जमानत, पुलिस की कार्रवाई पर उठाया सवाल
Tue, 14 Jul 2020 09:35 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 14 Jul 2020 09:35 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक आरोपी शमीम को जमानत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने आरोपी को दंगों के कई दिनों बाद बीट कांस्टेबल की निशानदेही पर गिरफ्तार किया था।
अदालत ने इस आधार पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद कमजोर साक्ष्य है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि पुलिस ने दंगे के कई दिन बाद बीट कांस्टेबल द्वारा पहचान के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी की।
अगर बीट कांस्टेबल आरोपियों को पहचानता था तो उसने तभी पुलिस स्टेशन में इसकी सूचना क्यों नहीं दी। घटना के कई दिन बाद बीट कांस्टेबल की निशानदेही के आधार पर गिरफ्तारी तर्कसंगत नहीं लगती।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि यह एक कमजोर साक्ष्य है, इसलिए शमीम को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी जाती है। पुलिस ने शमीम को दयालपुर इलाके में एक स्कूल में तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने दंगे से जुड़े दो अन्य मामलों में गिरफ्तार दो आरोपियों सोनू कुमार और श्याम पटेल को भी जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं है, जिनसे दंगे में इनकी मौजूदगी साबित हो सके।
विज्ञापन
अदालत ने इस आधार पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद कमजोर साक्ष्य है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि पुलिस ने दंगे के कई दिन बाद बीट कांस्टेबल द्वारा पहचान के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी की।
विज्ञापन
अगर बीट कांस्टेबल आरोपियों को पहचानता था तो उसने तभी पुलिस स्टेशन में इसकी सूचना क्यों नहीं दी। घटना के कई दिन बाद बीट कांस्टेबल की निशानदेही के आधार पर गिरफ्तारी तर्कसंगत नहीं लगती।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि यह एक कमजोर साक्ष्य है, इसलिए शमीम को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी जाती है। पुलिस ने शमीम को दयालपुर इलाके में एक स्कूल में तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने दंगे से जुड़े दो अन्य मामलों में गिरफ्तार दो आरोपियों सोनू कुमार और श्याम पटेल को भी जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं है, जिनसे दंगे में इनकी मौजूदगी साबित हो सके।