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दिल्ली हिंसाः शिष्य ने जान पर खेलकर बचाई गुरु की जिंदगी 

Fri, 28 Feb 2020 06:21 AM IST
संजीव कुमार झा शुजात आलम, अमर उजाला
शुजात आलम, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 28 Feb 2020 06:21 AM IST
सार

  •  राष्ट्रीय स्तर के पहलवान मोहम्मद शाहिद के घर में आग लगाने पहुंचे थे उपद्रवी
  •  शिष्य शीशराम ने तीन दिन तक दिया उनके घर पर पहरा, दोस्तों का भी लिया साथ 

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Delhi violence, The disciple saved the Guru life in dangerous situation
शीशराम( बाएं से पहले) अपने गुरु मो. शाहिद के परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घोंडा गांव में एक हिंदू शिष्य ने अपनी जान पर खेलकर अपने मुस्लिम गुरु और उसके परिवार की न सिर्फ रक्षा की बल्कि रात-रातभर जागकर उसके घर की हिफाजत की। भावुक होकर गुरु मोहम्मद शाहिद पहलवान अपने शिष्य शीशराम को दुआएं देते नहीं थक रहे थे।

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राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे शाहिद बताते हैं कि उन्होंने शीशराम को पहलवानी के गुर सिखाए थे। शीशराम ने पहलवानी में कई खिताब जीतकर हिमाचल केसरी का तमगा हासिल कर अपने गुरु का नाम रोशन किया।

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कई बार आग लगाने पहुंचे दंगाई

हिंसा वाले दिनों में दंगाइयों ने शाहिद के घर पर हमला करने की पूरी कोशिश की, लेकिन शीशराम और उसका परिवार उनके घर के आगे खड़ा हो गया। शीशराम का कहना था कि यदि आग लगानी है तो पहले मेरे घर में लगा दो।

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पांच-छह बारदंगाई आग लगाने पहुंचे, लेकिन शीशराम और उसके दोस्त चिराग उर्फ पिंचू, बबलू उर्फ बिजेंद्र, राजू और मनोज दीवार बनकर उनके घर के बाहर खड़े हो गए। बवाल के दौरान गांव की महिला अली फातिमा ने घर के सामने वाले मंदिर में जाकर अपनी जान बचाई। पड़ोसियों ने भी इंसानियत का धर्म निभाया और उपद्रवियों को खदेड़ दिया।

पहले दादा अब पोते ने निभाया इंसानियत का फर्ज

मोहम्मद शाहिद पहलवान बताते हैं वह परिवार के साथ 1947 से पहले घोंडा गांव में रहते हैं। इनके दादा गांव के अमीन थे। गांव में ही इनकी पुश्तैनी जमीन है। 1947 में बंटवारे के समय भी लोगों ने इन्हें गांव से निकालने का प्रयास किया तो उस समय भी गांव के मुखिया शीशराम के दादा ने विरोध कर परिवार को नहीं जाने दिया था।

अब शीशराम ने अपना फर्ज निभाकर उनके परिवार की रक्षा की। शाहिद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। स्पोर्ट्स कोटे उनकी नियुक्ति सीआईएसएफ में हुई थी। परिवार में पत्नी नूरजहां, तीन बेटे कासिम, नाजिम और मोहसिन गुलाब अली है। मोहसिन गुलाब अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी है।

उसने कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल भी हासिल किया था। उसकी तैनाती फिलहाल सेना में है। शाहिद ने अपने व बेटे के मेडल भी दिखाए। इनके घर बराबर में अफसर अली भी रहते हैं। उनके परिवार में छह सदस्य हैं। अफसर के दोस्तों ने भी उसके परिवार की रक्षा की।

मंदिर में घुसकर फातिमा ने बचाई जान

घोंडा चौक के पास रहने वाली अली फातिमा ने बताया कि वह 20-22 साल से राकेश चौधरी के मकान में किराए पर रहती हैं। उसके पति असगर अली मूलरूप से गांव सांकनी (बुलंदशहर) के रहने वाले हैं। पति चौक पर ही जूस की रेहड़ी लगाते हैं। इसके चार बच्चे हैं।

सोमवार और मंगलवार को हिंसा हुई तो अली फातिमा घर के सामने ही मौजूद मंदिर में घुस गई। पड़ोसियों ने मंदिर में उनकी और परिवार की हिफाजत की। फातिमा की पड़ोसन बुजुर्ग रेशवती ने कहा कि वह अपनी बेटी की तरह की उसे मानती है। जब तक वह जिंदा हैं कोई भी फातिमा और उसके परिवार को हाथ नहीं लगा सकता है।

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