फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   delhi violence, karawal nagar boy gaurav says remembers the dreaded scene even while reading

दिल्ली हिंसा: बच्चों ने सुनाई आपबीती, कहा- पढ़ते हुए भी याद आ जाता है वह खौफनाक मंजर

Sat, 29 Feb 2020 03:25 AM IST
संजीव कुमार झा किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 29 Feb 2020 03:25 AM IST
विज्ञापन
delhi violence, karawal nagar boy gaurav says remembers the dreaded scene even while reading
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
करावल नगर इलाके में बेशक तबाही का मंजर थम गया हो, लेकिन अभी भी लोगों में खौफ है। इनमें वे मासूम चेहरे भी शामिल हैं जिन्होंने न अब तक ऐसे खौफनाक मंजर के बारे में सुना था और न ही देखा था।
विज्ञापन


जो बच्चे शाम ढलते ही यहां की गलियों में खेलकूद कर मोहल्ले की रौनक को बढ़ा देते थे, आज वे भी घरों में दहशत के कारण डर कर बैठे हैं। आलम यह है कि बच्चे मार्च में होनेे वाली परीक्षाओं के लिए भी खुद को तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन


करावल नगर इलाके में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले गौरव ने बताया कि हिंसा के दौरान जो यहां माहौल देखा, इससे पहले कभी ऐसे माहौल के बारे में न सुना था और न देखा था। घर की खिड़की से झांकने पर सिर्फ पत्थर व काला धुआं दिखाई दे रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कानों में बार-बार धमाके की आवाज चीरते हुए आ रही थी। मानो लग रहा था कि अब बचना मुश्किल है। परिवार में पूछा तो परिजनों ने कहा कि बाहर के हालात ठीक नहीं हैं, इसलिए घर में ही रहकर पढ़ाई करो, मार्च में परीक्षाएं हैं।

ऐसे में पढ़ने के लिए जब भी बैठता हूं तो बार-बार वही आवाजें कानों में गूंजती हैैं। खौफनाक मंजर याद आ जाता है। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले अनुराग ने बताया कि जब से यहां हिंसा छिड़ी थी तब से घर में ही बंद हूं। पहले अपनी कॉलोनी के दोस्तों के साथ प्रतिदिन शाम को महफिल जमती थी और गली में खेलना होता था, लेकिन अब घर से बाहर निकलने में डर लगता है।


चौथी कक्षा में पढ़ने वाले उत्तम सिंह ने कहा कि दो मार्च में परीक्षाएं होने वाली हैं। इसके लिए घर से लेकर ट्यूशन तक पढ़ाई का दौर जारी था, लेकिन जब से यहां हालात बदले हैं तब से घर में कैद हूं। घटना के कारण ट्यूशन तक नहीं जा पा रहा हूं। हिंसा की वजह से पढ़ाई पर भी असर हुआ है। छोटा हूं समझ कम है, लेकिन इतना जानता हूं कि सभी को आपस में मिलकर रहना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed