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डीयू का 99वां दीक्षांत समारोह: राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दिए मैडल, रिकॉर्ड 910 पीएचडी डिग्री की गई प्रदान

Sat, 25 Feb 2023 07:04 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 25 Feb 2023 07:04 PM IST
सार

डीयू में पहली बार छात्रों ने औपनिवेशिक गाउन में नहीं बल्कि तीन अलग-अलग रंगो के अंगवस्त्र पहन कर डिग्री ली। इस बार से पुराने गाउन पहन कर डिग्री लेने की पंरपरा को समाप्त कर दिया गया है। इस अंगवस्त्र पर डीयू का लोगो बना हुआ था।

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Delhi Universitys 99th Convocation President Draupadi Murmu presented medals to the students
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छात्रों और सभागार में मौजूद लोगो को संबोधित करते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि वे नए भारत और नए विश्व निर्माण के लिए नए और बड़े सपने देखें। जीवन में बड़ा बनना अच्छी बात है लेकिन अच्छा होना इससे भी बड़ी बात है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के 99वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छात्रों की सोच का दायरा बड़ा और जिम्मेवारी अधिक होनी चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री धमेंद्र प्रधान भी उपस्थित रहे।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में शनिवार को खेल परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में 99वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि बेहतर इंसान बनना शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म ने डीयू के गौरवपूर्ण इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान डीयू के अनेक विद्यार्थियों ने विद्रोह किया और जेल गए। डीयू के इस क्षेत्र को स्वाधीनता सेनानियों का आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि भारत माता के उन सपूतों से प्रेरणा लेकर आप सबको नए भारत का निर्माण करना है।
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उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हम सभी भाषाओं और संस्कृतियों का आदर करें, लेकिन अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहें। जड़ों से ही संजीवनी और सृजनशीलता मिलती है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि उनसे पदक प्राप्त करने वाले छ: विद्यार्थियों में से तीन विद्यार्थी दिव्यांग रहे। इसे उन्होंने विद्यार्थियों के अदम्य साहस और परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अच्छाईयों को आगे बढ़ाए और गलतियों को सुधारें।

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छात्र राष्ट्रहित के लिए काम करें- प्रो. योगेश सिंह
डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने डीयू एक मई 1922 से तीन कॉलेजों से शुरू हुई यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय 1923 से लगातार अपने दीक्षांत समारोह आयोजित करता आ रहा है। अक्सर ऐसा नहीं होता है लेकिन डीयू ने ऐसा किया और ये गर्व की बात है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र हित के लिए काम करें। इस अवसर पर डीयू डीन परीक्षा शाखा प्रो डीएस रावत, डीयू दक्षिणी दिल्ली परिसर के निदेशक प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. बलराम पाणी, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, एसएओएल की निदेशक प्रो. पायल मग्गो, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. पंकज अरोड़ा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लाल, पीले व नीले अंगवस्त्र पहन कर ली डिग्री
डीयू में पहली बार छात्रों ने औपनिवेशिक गाउन में नहीं बल्कि तीन अलग-अलग रंगो के अंगवस्त्र पहन कर डिग्री ली। इस बार से पुराने गाउन पहन कर डिग्री लेने की पंरपरा को समाप्त कर दिया गया है। इस अंगवस्त्र पर डीयू का लोगो बना हुआ था। लाल रंग का अंगवस्त्र पीएचडी करने वाले, नीला स्नाकोत्तर डिग्री व पीला स्नातक डिग्री लेने वाले छात्रों ने पहना हुआ था।

राष्ट्रपति ने इन विद्यार्थियों को पहनाएं मैडल
दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों से चार विद्यार्थियों को पदक पहनाए। इनमें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए मेधा चौहान को डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मैडल प्रदान किया गया। एमएससी नर्सिंग के लिए आसवथी एमयू को राष्ट्रपति गोल्ड मैडल प्रदान किया गया। पायल काजला को बीएससी ऑनर्स नर्सिंग में राष्ट्रपति सिल्वर मैडल तथा बीएससी ऑनर्स नर्सिंग के लिए ही श्रद्धा विश्वनाथन पुरस्कार प्रदान किया गया। तनिश सोनी को राष्ट्रपति के हाथों आर्ट्स स्ट्रीम में वाइस चांसलर गोल्ड मैडल प्रदान किया गया।

एक क्लिक से 1,54,750 विद्यार्थियों को मिली डिजिटल डिग्री, पीएचडी का फिर बना रिकॉर्ड
दिल्ली विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो योगेश सिंह ने टैब पर क्लिक करके एक साथ 1,54,750 विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्री जारी की। इस वर्ष स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कुल 1,57,290 डिग्री प्रदान की गई। इसके साथ ही 910 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री भी प्रदान की गई जिनमें 512 महिला और 398 पुरुष विद्यार्थी हैं। कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय व भारत के इतिहास में अब तक डिग्री देने वाली यह सर्वाधिक संख्या है। बीते वर्ष डीयू ने पीएचडी की 800 से अधिक डिग्री देकर रिकॉर्ड बनाया था। शनिवार को दीक्षांत समारोह में कुल 170 विद्यार्थियों को मैडल व पुरस्कार प्रदान किए गए जिनमें 51 पुरुष और 119 महिला विद्यार्थी शामिल हैं। चिकित्सा क्षेत्र में डीएमएमसीएच के 47 विद्यार्थियों को भी इस अवसर पर डिग्री प्रदान की गई।

डीयू का कुलगीत व शताब्दी स्मारक लोगो वॉल्यूम भी जारी किया गया
समारोह में डीयू कुलपति प्रो योगेश सिंह ने शताब्दी वर्ष में तैयार किया गया कुलगीत जयति जय-जय-जयति जय-जय भी जारी किया गया। इस कुलगीत को विख्यात कवि गजेंद्र सोलंकी द्वारा लिखा और स्वरबद्ध किया गया है। इसके साथ ही कुलपति द्वारा शताब्दी स्मारक लोगो वॉल्यूम भी जारी किया गया।

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