डूसू चुनाव: मेट्रो के रियायती पास, रूम रेंट कंट्रोल एक्ट, हॉस्टल जैसे मुद्दे छात्र संगठनों के बनेंगे हथियार
डूसू के दंगल में इस बार मेट्रो के रियायती पास, रूम रेंट कंट्रोल एक्ट, छात्राओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ, हॉस्टल बनाने, हॉस्टल दाखिले के लिए सेंट्रलाइज्ड पोर्टल, कॉलेज के संसाधनों को बढ़ाने से मुद्दे संगठनों के जीतने का हथियार बनेंगे।
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनावी बिसात में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए छात्र संगठन जी जान से जुट गए हैं। डूसू के दंगल में इस बार मेट्रो के रियायती पास, रूम रेंट कंट्रोल एक्ट, छात्राओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ, हॉस्टल बनाने, हॉस्टल दाखिले के लिए सेंट्रलाइज्ड पोर्टल, कॉलेज के संसाधनों को बढ़ाने से मुद्दे संगठनों के जीतने का हथियार बनेंगे। संगठन ऐसे मुद्दों को लेकर छात्रों से संपर्क साध रहे हैं।
डीयू छात्र संघ का बिगुल बजते ही छात्र संगठनों के स्तर पर चुनाव प्रचार में तेजी आ गई है। छात्र संगठन अपने-अपने मुद्दों को छात्रों के बीच ले जाने में जुट गए हैं। डूसू पर किसका कब्जा होगा, इसको लेकर मुख्य मुकाबला एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच है। इस बार दोनों संगठन छात्र मुद्दों के साथ ही महिला सुरक्षा के मुद्दों पर भी फोकस करके चल रहे हैं। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) प्रदेश मंत्री हर्ष अत्री ने बताया कि हम छात्रों से जुड़े मुद्दों को ही चुनाव में उठा रहे हैं। प्री इलेक्शन कैंपेन के तहत छात्रों से संवाद स्थापित किया जा रहा है। छात्रों के बीच हम एबीवीपी की साल भर की उपलब्धियों को रख रहे हैं। छात्रों से मिले फीडबैक के आधार पर ही हम जल्द ही अपना घोषणा पत्र भी तैयार करेंगे।
अभी जिन मुद्दों को छात्रों के बीच उठा रहे हैं उनमें मेट्रो के रियायती पास, हर कॉलेज में एनसीसी, छात्राओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ, एससी-एसटी ओबीसी छात्रों की छात्रवृति में इजाफा, प्लेसमेंट सेल को बेहतर करने, हॉस्टल बनाने, हॉस्टल के दाखिले के लिए सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाने के मुद्दे शामिल हैं। नए कॉलेज के मुद्दे भी शामिल होंगे।
कांग्रेस की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) इस साल डीयू में सभी महिला छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश लागू करने के मुद्दे को लेकर चल रही है। एनएसयूआई की ओर से भी प्री कैंपेनिंग शुरु कर दी गई है। इसके लिए 12 से अधिक छात्रों को मैदान में उतारा गया है, जिनमें से चार को चुनाव लड़ाने के लिए चुना जाएगा। यह जमीनी स्तर पर छात्रों के मुद्दों को समझने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही महिला सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रहेगा।
वहीं छात्र संगठन आइसा का मुख्य मुद्दा चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने को लेकर है। आइसा सचिव अंजलि ने कहा कि हमारा मुद्दा है कि यूनिवर्सिटी में अच्छी व सस्ती शिक्षा मिले, क्योंकि हम छात्रों की शिक्षा और रहने के खर्च में बढ़ोतरी देख रहे हैं। हॉस्टल की कमी है, रूम रेंट कंट्रोल एक्ट नहीं है, इस मुद्दे को भी हम प्रमुखता से उठा रहे हैं। चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में आंतरिक मूल्यांकन को भी 45 फीसदी वेटेज दे दी गई है। यह भी कम किया जाना चाहिए। कैंपस में महिला सुरक्षा को लेकर जेंडर सेंसटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित कराने का मुद्दा भी हमारे एजेंडे में है।
महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग को लेकर याचिका
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ की ओर से याचिका पर बुधवार को सुनवाई किए जाने की संभावना है। अधिवक्ता आशु बिधूड़ी द्वारा प्रतिनिधित्व की गई याचिकाकर्ता शबाना हुसैन ने कहा कि छात्रसंघ चुनावों में धन और बाहुबल का बहुत अधिक प्रभाव है जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है।