अपनी डिग्रियों पर 'कोरोना' की छाप नहीं चाहते स्टूडेंट्स, ऑफलाइन एग्जाम की कर रहे मांग
- 10 जुलाई से होनी हैं डीयू की मुख्य परीक्षाएं, मंगलवार को भी हिंदी के छात्रों को मिले बी.कॉम के पेपर
- छात्र चाहते हैं, बाद में ऑफलाइन मोड से हो परीक्षा, ताकि रिजल्ट पर नकारात्मक असर न पड़े
- UGC ने विश्वविद्यालय पर छोड़ा परीक्षा के तरीके का चुनाव
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इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन मॉक टेस्ट का आयोजन करा रहा है। जाहिर तौर पर वे मॉक टेस्ट नहीं दे पा रहे हैं। इस परिस्थिति में वे ओपन बुक एग्जामिनेशन के माध्यम से होने वाली परीक्षा में भी शामिल नहीं हो पाएंगे।
अगर विश्वविद्यालय औसत नंबरों से छात्रों को पास कर देता है, तो इससे उनकी डिग्री पर असर पड़ सकता है। वे नहीं चाहते कि उनकी डिग्री पर जिंदगीभर के लिए कोरोना की छाप पड़े।
गोपाल गंज, बिहार के छात्र रोशन कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए ऑनर्स हिंदी के छात्र हैं। मार्च में ही वे अपने घर चले गये थे। यहां पर भी लगातार बारिश की समस्या बनी हुई है।
कई दिनों से बिजली नहीं आ रही है। कॉमन सर्विस सेंटर वाले दिल्ली विश्वविद्यालय की परीक्षा पद्धति से परिचित नहीं हैं। साइबर कैफे में अलग बैठने की जगह नहीं मिल पाती है।
लोगों की भीड़ के बीच बैठकर डीयू की परीक्षा देना संभव नहीं हो पा रहा है। उनकी डिग्री पर कोरोना का असर पड़ना तय हो गया है।
मणिपुर के छात्र सोमिथि बताते हैं कि उनके पूरे एरिया में अभी भी केवल टूजी इंटरनेट सर्विस है। यहां इंटरनेट से डीयू का मॉक टेस्ट देना संभव नहीं है।
प्रश्न पत्र भी डाउनलोड नहीं हो रहे हैं। वे चाहते हैं कि कोरोना काल के बाद यूनिवर्सिटी किसी अलग तरीके से उनकी परीक्षाएं ले, जिससे उनका भविष्य भी खराब न हो और उन्हें कोरोना से भी बचने का अवसर मिल जाए।
फरीदाबाद की भावना हिंदी ऑनर्स की स्टूडेंट हैं। मंगलवार को उन्होंने मॉक टेस्ट देने की कोशिश की थी, लेकिन उनके हिंदी प्रश्नपत्र की जगह बी.कॉम ऑनर्स के पेपर आ गये।
भावना कहती हैं कि अगर मुख्य ओपन बुक एग्जामिनेशन के दौरान इसी तरह की गड़बड़ी हुई, तो उनकी डिग्री का क्या होगा।
वे चाहती हैं कि इस समय परीक्षाएं आयोजित न की जाएं और बाद में ऑफलाइन परीक्षाएं कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि वे बिलकुल नहीं चाहतीं कि उनकी डिग्री पर कोरोना का कोई असर पड़े।
एबीवीपी ने की ये मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सचिव सिद्धार्थ यादव ने कहा कि इन्हीं समस्याओं को देखते हुए उनके संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सोमवार को मुलाकात की।
ABVP चाहती है कि जेएनयू और जामिया की तरह यहां भी असाइनमेंट देकर छात्रों का मूल्यांकन हो, या विश्वविद्यालय अपनी सुविधानुसार परीक्षा की कोई भी अन्य उचित पद्धति स्वीकार करे, जिससे छात्रों का नुकसान न हो।
इससे छात्रों के बीच शारीरिक दूरी बनाये रखना भी संभव होगा और उनका सही मूल्यांकन भी होगा।
ABVP ने कहा है कि वह बिना परीक्षा के अंतिम वर्ष के छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रमोट करने के पक्ष में नहीं है।
आपात परिस्थिति में विश्वविद्यालय छात्रों को उनकी अगली कक्षाओं में प्रवेश दे सकता है लेकिन बाद में सही समय पर उनकी परीक्षा लेकर उचित रिजल्ट देना चहिये।
विश्वविद्यालय बच सकता था
दिल्ली विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश झा ने अमर उजाला को बताया कि विश्वविद्यालय चाहता तो इस समस्या से बचा जा सकता था।
अगर डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल और अकादमिक काउंसिल के माध्यम से चीजों को नियम के अनुसार चर्चा कर आगे बढ़ाया जाता तो इन समस्याओं का समाधान पहले ही कर लिया गया होता।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को इस परिस्थिति से निकलने के लिए OBE कैंसिल कर सही समय पर ऑफलाइन मोड से परीक्षाएं लेनी चाहिए।