Delhi Traffic: 117 जाम प्वाइंट...10 किमी/घंटे की रफ्तार, 25 KM में लगे सवा 2 घंटे; ऐसा है सड़कों का हाल
दिल्ली की सड़कों पर हमेशा ही जाम की स्थिति देखी जाती है। हर दिन दफ्तर से घर और घर से दफ्तर के लिए लोगों को जाम की समस्या से दो चार होना ही पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। इसको सीमित किए बिना औसत चाल बेहतर करने की कोई गुंजाइश नहीं बनती। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट.....
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दिल्ली इस वक्त ठहरी हुई है। आप चाहे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें या निजी वाहन का, दिल्ली की हर सड़क पर वाहनों की औसत रफ्तार 10 किमी बैठती है। अमर उजाला के चार संवाददाताओं ने सोमवार इसकी हकीकत भी जानी। दिल्ली में चार दिशाओं से दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस स्थित गोल पोस्ट आफिस तक पहुंचने में कमोबेश औसत चाल में फर्क नहीं दिखा। विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। इसको सीमित किए बिना औसत चाल बेहतर करने की कोई गुंजाइश नहीं बनती। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट.....
बस से...25 किमी में लगे सवा दो घंटे
पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ से सोमवार सुबह 9:00 बजे निकलना हुआ। टर्मिनल पर 9:15 बजे पर बस मिली। शिवाजी मार्ग पर चलते ही करीब दस मिनट बार जाम से दो-चार होना पड़ा। करीब 500 मीटर तक बस रेंगते हुए आगे बढ़ी। यहां से आगे निकलने पर बस करीब 1.50 किमी आगे बढ़ी थी कि द्वारका मोड पूरी तरह जाम रहा। इस बीच बस रफ्तार नहीं पकड़ सकी। वहां से निकलने के बाद उत्तम नगर चौक, पंखा रोड पर उत्तम नगर से सागरपुर तक चार जगहों पर जाम मिला। आगे दिल्ली कैंट स्थित किब्री प्लेस लाल बत्ती, धौला कुआं और सरदार पटेल मार्ग पर भी आवाजाही सामान्य नहीं रही। पूरे रास्ते बस रेंगते हुए आगे बढ़ती रही। नतीजतन नजफगढ़ से जीपीओ तक करीब 25 किमी की दूरी तय करने में सवा दो घंटे का समय लग गया। रविवार को छोड़ हर दिन आवाजाही एक सी रहती है। (पश्चिमी दिल्ली से विनोद डबास)
दूरी 12 किमी, स्कूटी से लगा 55 मिनट का समय
सुबह करीब 10:15 बजे, दक्षिणी दिल्ली के सरोजिनी नगर से जैसे ही अपने दोपहिया वाहन से ऑफिस के लिए निकले, अवैध पार्किंग व अतिक्रमण के बीच चलना मुश्किल रहा। 500 मीटर पार करने में 12-15 मिनट लग गए। आगे सफदरजंग अस्पताल के पास लंबा जाम लगा है। इससे बचने के लिए कई वाहन चालक उलटी दिशा से गुजरते दिखे। कुछ ने फुटपाथ पर भी बाइक चढ़ा रखी थी। स्कूटी रेंगते हुए आगे बढ़ रही थी। हर दिन की तरह सोमवार भी आईएनए से लोक कल्याण मार्ग की तरफ जाने वाले रास्ते पर वाहनों की लंबी लाइन मिली। सड़क पूरी तरह से वाहनों से ठसाठस भरी हैं। इसमें एक एंबुलेंस भी फंसी थी। इसके बाद थोड़ी राहत मिली। इसके बाद सफदरजंग मकबरे के पास रेड लाइट खराब होने से हर तरफ वाहनों की रेलमपेल थी। 12 किमी की दूरी तय करने में 55 मिनट लग गए। (दक्षिणी दिल्ली से आशीष सिंह)
कार से...10 किमी की दूरी में लगा एक घंटा
उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर से 10:15 बजे कार से निकलना हुआ। घर से निकलते ही मुखर्जी नगर पर वाहनों की कतार थी। आगे परमानंद, इंदिरा विहार और संत नगर से रिंग रोड तक दो किलोमीटर दूर रिंग रोड पर पहुंचने में ही 15-20 मिनट लग गए। जीटीबी मेट्रो स्टेशन टी प्वाइंट पर आड़े-तिरछे खड़े बैट्री रिक्शा और फटफट सेवा ने जाम कर रखा था। दिल्ली विश्वविद्यालय की तरफ से छात्रा मार्ग पर पहुंचने पर टूटी सड़क ने स्वागत किया। करीब एक साल से खुदी सड़क पर जल बोर्ड की पाइप लगाने का काम तो पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक सड़क सपाट नहीं हो सकी है। एक लेन से ही आवाजाही बनी रही। इससे आगे हिंदू राव अस्पताल की तरफ रिज एरिया में तीस हजारी कोर्ट तक एक किलोमीटर वाहन रेंग रहे थे। इससे आगे झंडेवालान फ्लाइओवर पर थोड़ी रफ्तार मिली, लेकिन आधे किमी बाद दुबारा से जाम से दो-चार होना पड़ा।
वाया मेट्रो... 50 मिनट में आठ किमी
सुबह करीब दस बजे गोल पोस्ट ऑफिस पहुंचने के लिए पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन की मेट्रो की सवारी की। सुरक्षा जांच समेत इंट्री गेट से प्लेटफार्म तक पहुंचने की दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने में दस मिनट का समय लगा। फ्रीक्वेंसी तीन मिनट की थी। अगले पांच मिनट में यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक पहुंचना हो गया। इसी बीच नोएडा से द्वारका जाने वाली मेट्रो ट्रेन दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंची थी। नोएडा से चलने वाली ट्रेन को स्टेशन से पहले रवाना किया गया। इसकी वजह से लक्ष्मी नगर से द्वारका जाने वाली ट्रेन को करीब छह मिनट स्टेशन पर ही रोका गया। अमूमन इस स्टेशन पर यही स्थिति रहती है। आगे करीब पंद्रह मिनट बाद राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पहुंचना हुआ। यहां से येलो लाइन मेट्रो पकड़ पटेल चौक और फिर जीपीओ 45-50 मिनट का समय लग गया।
दिल्ली में 117 जाम प्वाइंट
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी की 40 सड़कों का सर्वे किया है। इनमें 117 जाम प्वाइंट की पहचान की गई है। इसकी वजह अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, निर्माण गतिविधि के साथ हैवी ट्रैफिक है। सबसे बुरी हालत उत्तरी रेंज के रोहिणी, उत्तर-पश्चिम और बाहरी-उत्तर जिलों की है। यहां की 27 सड़कों पर वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं।
सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह सार्वजनिक परिवहन की कमी के साथ इसका भरोसमंद न होना है। इस मामले में मेट्रो अपवाद है, लेकिन इसमें भी लास्ट माइल कनेक्टिविटी का बड़ा इश्यू है। हम लोगों का जो अनुभव रहा है, उसमें सरकार को सार्वजनिक परिवहन को तवज्जो देनी होगी। और लोग अपनी कार या बाइक तभी छोड़ेंगे, जब उनको भरोसेमंद परिवहन सेवा मिलेगी। -सयन रॉय, प्रोग्राम मैनजर, सस्टेनिबिल ट्रांसपोर्ट, सीएसई