महिलाओं से छिनने वाली है ये आजादी
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राष्ट्रपति शासन में महिलाओं को मिली 20 साल पुरानी आजादी खत्म होगी। महिला दुपहिया वाहन चलाए या पीछे बैठे, पुरुषों की तरह उसे भी हेलमेट लगाना अनिवार्य होगा। उपराज्यपाल नजीब जंग ने इसकी अनुमति दे दी है।
परिवहन विभाग ने उपराज्यपाल नजीब जंग से हरी झंडी मिलने का हवाला देकर आचार संहिता लागू होने के कारण अधिसूचना जारी करने की चुनाव आयोग से अनुमति मांगी है।
अनुमति मिलते ही ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करके एक महीने में आपत्तियां मंगाई जाएंगी। फिर महिलाओं को जो छूट दिल्ली सरकार ने दी थी, उसे वापस ले लिया जाएगा।
पगड़ी धारक सिखों को छूट
केंद्रीय मोटर वाहन अनिधिनियम में किसी भी दुपहिया चालक या पिछली सीट पर बैठने वालों को हेलमेट लगाना अनिवार्य है। सिर्फ पगड़ी धारक सिखों को छूट दी गई है, लेकिन 1993 में बीजेपी की साहब सिंह वर्मा सरकार के कार्यकाल में सिख समुदाय के विरोध के बाद सिख महिलाओं को भी इससे बाहर रखा गया।
कोर्ट में याचिका दायर हुई तो अक्तूबर, 2013 में दिल्ली सरकार ने शपथ पत्र देकर बताया कि महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट देने का अधिकार है। अनिवार्यता जरूरी नहीं है। इस पर कोर्ट ने सरकार पर छोड़ दिया था कि छूट दे या अनिवार्य करे।
हो रही थी महिलाओं की मौत
उपराज्यपाल नजीब जंग के पास पिछले दिनों किसी संस्था ने फिर यह मामला उठाया, तो विभाग को निर्देश दिया गया कि दुर्घटनाओं में महिलाओं की मौत हो रही है। इसलिए हेलमेट लगाने की अनिवार्यता लागू की जाए।
आंकड़े बताते हैं कि 2012 में दुपहिया वाहनों के हादसे में 42 महिलाओं की मौत हुई, जबकि 2013 में 63 महिलाओं ने दम तोड़ा। खास बात यह है कि इसमें 57 पिछली सीट पर बैठीं थी, जबकि सिर्फ 6 दुपहिया चला रहीं थी।