'बिजली कीमत तय करने से बचते हैं दिल्लीवासी'
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बिजली पर दिल्ली में खूब राजनीति होती है और सरकार बनती-बिगड़ती भी है, केजरीवाल सरकार को प्रचंड बहुमत मिलने की एक बड़ी वजह बिजली पर जनता से किए वादे भी थे।
इन सब के बावजूद दिल्ली के आम बिजली उपभोक्ता बिजली कीमत तय करने अथवा बिजली व्यवस्था में सुधार पर राय देने से परहेज करते हैं।
एक माह से अधिक समय से आयोग उपभोक्ताओं से सुझाव मांग रहा है लेकिन अभी तक महज 150 ने ही अपने सुझाव भेजे हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में बिजली कीमत तय करने के लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग की ओर से मार्च से उपभोक्ताओं से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
44 लाख लोगों में से 150 लोगों ने ही भेजे सुझाव
करीब 44 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से महज 150 ने ही अपनी राय और सुझाव भेजे हैं। इसमें भी ज्यादातर बिजली कंपनी अथवा विभाग से जुड़े लोग हैं।
कुछ आरडब्ल्यूए की ओर से सुझाव जरूर भेजे गए हैं लेकिन यह संख्या काफी कम है। डीईआरसी के चेयरमैन पीडी सुधाकर ने बताया कि अभी तक दो बार राय और सुझाव भेजने के लिए तारीख बढ़ाई गई है।
अब उपभोक्ता 24 अप्रैल तक आयोग को अपनी राय और सुझाव भेज सकते हैं। आयोग भी चाहता है कि बिजली कीमत तय करने में अधिक से अधिक उपभोक्ता अपनी राय दें। इसके बाद जनसुनवाई बुलाई जाएगी।