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बेदर्द दिल्ली का शर्मसार करने वाला चेहरा आया सामने, राजधानी में भूख से तीन बच्चियों की मौत

Wed, 25 Jul 2018 05:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 25 Jul 2018 05:08 PM IST
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Delhi three minor girls of a family were found dead in Mandawali area
फाइल फोटो

देश की राजधानी दिल्ली में तीन बच्चियों की मौत भूख से तड़प तड़पकर हुई थी। मंगलवार को मंडावली में मृत मिली इन बच्चियों के पोस्टमार्टम के बाद लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के डॉक्टरों ने देश को शर्मसार करने वाला यह खुलासा किया। पोस्टमार्टम में बच्चियों शिखा (8), मानसी (4), पारुल (2) के पेट में खाने का एक भी अंश नहीं मिला। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें कई दिनों से खाना नहीं मिला था। दिल्ली सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। 

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भूख से मौत की बात सामने आने पर पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का फैसला किया। देर रात जीटीबी अस्पताल में बच्चियाें का फिर से पोस्टमार्टम कराया गया। इसकी रिपोर्ट बृहस्पतिवार को आ सकती है।
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पुलिस के मुताबिक बच्चियों का पिता मंगल ए-83, गली नंबर-14, साकेत ब्लॉक, मंडावली में रहता था। वह मकान मालिक मुकुल मेहरा का रिक्शा चलाता था लेकिन कुछ दिनों पहले असामाजिक तत्वों ने नशीला पदार्थ सुंघाकर रिक्शा लूट लिया। इससे वह कमरे का किराया भी नहीं दे पा रहा था। मंगल की पत्नी वीणा ने पुलिस को बताया कि शनिवार को मकान मालिक ने उसे कमरे से भी निकाल दिया।
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इसके बाद मंगल पत्नी व तीन बच्चियों को लेकर पंडित चौक स्थित अपने दोस्त नारायण के कमरे पर आ गया। रुपये न होने के कारण उन्हें खाना नहीं मिला। इससे बच्चियां बीमार हो गईं। वीणा ने उन्हें दवाइयां भी दी थीं। रविवार को पड़ोसियों को पता चला तो उन्होंने बच्चियों को खाना दिया, लेकिन वे बीमारी के कारण खाना खा नहीं र्पाइं। दोपहर के समय बच्चियां बेहोश हो गईं तो वीणा तीनों को लेकर एलबीएस अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  
 

पिता का फिलहाल सुराग नहीं
पुलिस का कहना है कि बच्चियों का पिता मंगल काम की तलाश में जाने की बात कहकर मंगलवार सुबह घर से निकला था। फिर लौटा नहीं। उससे पूछताछ के बाद ही पता चल पाएगा कि क्या वाकई उसे घर से निकाला गया था या नहीं।

सभी दवाइयों को एफएसएल लैब भेजा           
पुलिस को बच्चियों की मां मानसिक रूप से कमजोर लग रही है। उसने पुलिस को बताया कि उसने बच्चियों को दवा दी थी। पुलिस ने कमरे से कुछ दवाइयों को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए एफएसएल लैब भेज दिया है।

मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  - पंकज कुमार सिंह, पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त 

मामले की जांच कराएंगे : भारद्वाज
आप नेता सौरव भारद्वाज ने घटना को दुखद बताया और कहा कि कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाई जाएगी। 

यह घटना शर्मसार करने वाली है। संसद से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ऐसा हुआ है। सरकार को शर्म आनी चाहिए। हर जिले में बाल सुरक्षा समिति होती है जो बच्चों की पढ़ाई, पोषण और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखती है। वो क्या कर रही है। - राकेश सेंगर, बचपन बचाओ आंदोलन

वैश्विक भूख सूचकांक में भारत
12 अक्तूबर 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर है।
दुनिया की भूख से पीड़ित 25 प्रतिशत आबादी अपने देश में रहती है।
19 करोड़ लोग कुपोषित हैं। बाल कुपोषण से स्थिति और बिगड़ी है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 40 प्रतिशत खाना बर्बाद होता है। यह खाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये का है।
भारत उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे है लेकिन पाकिस्तान से आगे है । 

भुखमरी सूचकांक में भारत

वर्ष         सूचकांक
2013        63
2014        55
2015        80
2016        97
2017        100    

दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया
दिल्ली भाजपा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार को आड़े हाथ लिया है। बुधवार को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि इन बच्चियों की मौत की जिम्मेदार दिल्ली सरकार है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली के हरेक परिवार को घर बैठे राशन पहुंचाने का दावा करते हैं। वहीं, उन्हीं की दिल्ली में इस तरह की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। तिवारी ने कहा कि इस घटना की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस परिवार ने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया हुआ था, लेकिन उनका कार्ड नहीं बना। यह सरासर दिल्ली सरकार की विफलता है। इससे साबित हो गया है कि सरकार गरीबों के लिए कुछ नहीं कर रही है, बल्कि मात्र दिखावा करती है। देश की राजधानी में भूख से बच्चियों की मौत शर्मनाक है। 
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