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Delhi : अध्ययन से खुलासा- चैन की नींद छीन रहा है मोटापा, 60% लोगों में गंभीर बीमारी
Fri, 05 Jul 2024 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 05 Jul 2024 05:56 AM IST
सार
दिल्ली सरकार के जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आने वाले मरीजों की नींद पर हुए अध्ययन में 60 फीसदी लोगों में ये समस्या मिली।
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विस्तार
जीवन शैली में आए बदलाव के कारण लोगों में बढ़ रहा मोटापा चैन की नींद छीन रहा है। दिल्ली सरकार के जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आने वाले मरीजों की नींद पर हुए अध्ययन में 60 फीसदी लोगों में ये समस्या मिली। ऐसे लोग अक्सर कहीं भी कुर्सी या दूसरी जगह पर बैठ कर झपकी लेते हैं। सोते समय तेज खर्राटे लेते हैं। दिनभर थकावट रहने व नींद पूरी न होने की शिकायत करते हैं।
विशेषज्ञों की माने तो खराब जीवन शैली के कारण हर दूसरे आदमी में मोटापे की समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। इन लोगों में एक समय के बाद दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, पार्किन्सन, मूवमेंट डिसऑर्डर सहित दूसरे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे लोग गाड़ी चलाते समय झपकी के कारण दूसरे लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन जाते हैं।
न्यूरोलॉजी विभाग की डॉ. वसुंधरा अग्रवाल ने बताया कि हर शनिवार को अस्पताल में मोटापे सहित दूसरे कारणों में मरीजों की नींद की जांच की जाती है। इसमें 12 घंटे तक मरीज को विशेष कक्ष में रखकर उसके सोने का समय, नींद का स्तर, हाथ पैर हिलाने, खर्राटे लेने आदि का मूल्यांकन किया गया। मरीजों की जांच के बाद रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर 60 फीसदी मरीज गंभीर श्रेणी में पाए गए।
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12 घंटे की निगरानी में रहता है मरीज
अस्पताल में हर माह आठ मरीजों की जांच होती है। रात 8 से सुबह 8 बजे तक मरीज डॉक्टर की निगरानी में रहता है। जांच के लिए बनाए गए विशेष कक्ष में मरीज की तीन तरह की जांच होती है। इसमें इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी), इलेक्ट्रोओकुलोग्राम (ईओजी) और इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) जांच होती है। जांच के दौरान कंप्यूटर की मदद से मॉनिटरिंग की जाती है।
इन पर रहती है नजर
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विशेषज्ञों की माने तो खराब जीवन शैली के कारण हर दूसरे आदमी में मोटापे की समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। इन लोगों में एक समय के बाद दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, पार्किन्सन, मूवमेंट डिसऑर्डर सहित दूसरे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे लोग गाड़ी चलाते समय झपकी के कारण दूसरे लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन जाते हैं।
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न्यूरोलॉजी विभाग की डॉ. वसुंधरा अग्रवाल ने बताया कि हर शनिवार को अस्पताल में मोटापे सहित दूसरे कारणों में मरीजों की नींद की जांच की जाती है। इसमें 12 घंटे तक मरीज को विशेष कक्ष में रखकर उसके सोने का समय, नींद का स्तर, हाथ पैर हिलाने, खर्राटे लेने आदि का मूल्यांकन किया गया। मरीजों की जांच के बाद रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर 60 फीसदी मरीज गंभीर श्रेणी में पाए गए।
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12 घंटे की निगरानी में रहता है मरीज
अस्पताल में हर माह आठ मरीजों की जांच होती है। रात 8 से सुबह 8 बजे तक मरीज डॉक्टर की निगरानी में रहता है। जांच के लिए बनाए गए विशेष कक्ष में मरीज की तीन तरह की जांच होती है। इसमें इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी), इलेक्ट्रोओकुलोग्राम (ईओजी) और इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) जांच होती है। जांच के दौरान कंप्यूटर की मदद से मॉनिटरिंग की जाती है।
इन पर रहती है नजर
- कितने देर तक हल्की नींद में रहा मरीज
- कितनी देर तक गहरी नींद में रहा मरीज
- दिन के समय नहीं सोना चाहिए
- मोबाइल, टीवी का इस्तेमाल कम करें
- शाम चार बजे के बाद कॉफी-चाय न लें
- सोने का समय तय करें
- सोने के कमरे में अंधेरा रखें
- जीवन शैली में सुधार लाएं, योग करें