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श्रीनिवासपुरी में बनेंगी बहुमंजिला इमारतें, पुराने सरकारी आवास तोड़कर बनेंगे नए मकान

Sat, 23 Feb 2019 10:58 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 23 Feb 2019 10:58 AM IST
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delhi shriniwaspuri multi story buildings to built by breaking government residence
प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते वक्त केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी - फोटो : अमर उजाला

जनरल पूल रेजिडेंशियल एकॉमोडेशन (जीपीआरए) योजना के तहत दक्षिणी दिल्ली के श्रीनिवासपुरी इलाके में बहुमंजिली इमारतों का निर्माण कार्य शुक्रवार को शुरू हुआ। इसके तहत पुराने सरकारी आवास तोड़कर नए मकान बनाए जाने हैं। प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते वक्त केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) अगले दो साल में प्रोजेक्ट पूरा कर लेगा।

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हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि फिलहाल श्रीनिवासपुरी में 1429 अलग-अलग श्रेणियों के सरकारी आवास हैं। अब इन्हें तोड़कर बहुमंजिला इमारतें तैयार होंगी। इससे यहां पर आवास की संख्या करीब 4994 हो जाएगी।
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वहीं, हरियाली का भी विस्तार होगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सरकारी कर्मियों व अधिकारियों की आवास से जुड़ी समस्या को सीमित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इसके कुछ हिस्से को कमर्शियल व ऑफिस कार्य के लिए प्रयोग किया जा सकेगा।
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गौरतलब है कि एनबीसीसी ने किदवई नगर में जीपीआरए के तहत निर्माण कार्य किया है। हालांकि, इसके निर्माण में एनबीसीसी से लेकर केंद्रीय आवास मंत्रालय तक को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। पेड़ काटने को लेकर आम लोगों ने प्रोजेक्ट का विरोध किया है। इसे देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने सीपीडब्ल्यूडी को विशेष ऐहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं।

श्रीनिवासपुरी में पहले चरण की परियोजना

-850 विभिन्न श्रेणी के मकानों को पहले चरण में तोड़कर 2408 नई आवासीय इकाइयों का निर्माण होगा।
-इसमें 560 आवास टाइप-2, 1260 टाइप-3 व 588 टाइप-3 के होंगे।
-दो चरणों की योजना पर खर्च होंगे 3999 करोड़ रुपये।
-42 टॉवर में बनने वाली इमारतें होंगी 19-26 मंजिला।
-बेसमेंट सहित तीन मंजिल पर होगी पार्किंग।
-वर्षा जल संचयन, पर्यावरण संरक्षण के अलावा पेड़ों को काटने से करेंगे परहेज।
-पानी की बर्बादी रोकने के लिए ड्यूल पाइप सिस्टम रहेगा मकानों में।
-800 केवी बिजली की खपत पूरा करने में सौर ऊर्जा का सहारा।
-रिहायशी क्षेत्र में करीब पचास फीसदी भूमि को हरित क्षेत्र के लिए रखा जाएगा।
-पेड़ों को कटाई से बचाने के लिए बेसमेंट का साइज भी छोटा किया जाएगा।

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