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सवालों के घेरे में आई बिना बैठक पेड़ों की कटाई की मंजूरी, पौधरोपण पर भी उठे सवाल

Sat, 30 Jun 2018 10:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 30 Jun 2018 10:28 PM IST
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delhi shouth cutting tree matter after his permission
delhi trees

दिल्ली सरकार के पास अपनी कोई वन नीति नहीं है। 2007-08 के बाद से दिल्ली की हरियाली के लिए कोई नीति भी नहीं बनाई गई है। दिल्ली सरकार की वन नीति को लेकर शनिवार को सरोजनी नगर में नागरिक संगठनों ने नियंत्रक और महालेखा-परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर कई सवाल उठाए।

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कैग रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पेड़ संरक्षण कानून, 1947 के तहत पेड़ प्राधिकरण बनाया गया था। इस प्राधिकरण ने 2014-17 के दौरान सिर्फ एक बार बैठक की है। जबकि इस प्राधिकरण को अनिवार्य तौर पर करीब 12 बैठकें आयोजित करनी थीं। सीएजी की इस रिपोर्ट के आधार पर पेड़ों की कटाई को मंजूरी सरकार के जरिए कैसे दी गई इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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नागरिक संगठनों का कहना है कि  राजधानी में मौजूद सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ों को परियोजनाओं के नाम पर काटा जा रहा है, लेकिन इनकी भरपाई भी इमानदारी से नहीं की जा रही है। दिल्ली सरकार ने 2014-17 के बीच 28.12 लाख पौधरोपण ही किया। जबकि लक्ष्य 36.57 लाख पौधों को लगाने का था। यानी लक्ष्य से करीब 23 फीसदी कम (8.45) ही पौधरोपण हुआ। यह सरकार के पौधरोपण कार्यक्रम की संजीदगी पर भी सवाल उठाता है।  प्रदर्शन में पर्यावरणविद अनिल सूद, विक्रांत तोंगड़, पद्मावती द्विवेदी, ज्योति राघवन, अनिल पराशर, बिल्ली गुप्ता व अन्य मौजूद थे।   

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पेड़ों की जगह बदली उचित नहीं : मनवीर सिंह 

delhi shouth cutting tree matter after his permission
delhi chipko movement - फोटो : हिमांशु सोनी
पेड़ों की जगह बदली उचित नहीं : मनवीर सिंह 
भट्टा परसौल के किसान नेता मनवीर सिंह ने भी सरोजनी नगर में पेड़ों के कटाई का विरोध किया । उन्होंने कहा कि पहले जंगल लगाकर कोई परियोजना क्यों नहीं शुरू की जाती। पुराने पेड़ों को काटकर नन्हें पौधे लगाना और पेड़ों की जगह बदली (ट्रांसप्लांटेशन) बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। यह समस्या का समाधान नहीं हैं।  

साइकिल रैली से रास्तों में डालेंगे बीज  
एक जुलाई को तय किया गया है कि साइकिल रैली के जरिए उन रास्तों पर बीजों का छिड़काव किया जाएगा जहां पेड़ काटे जाने हैं। लोगों ने नारा दिया है कि तुम काटो, हम बोएंगे। नागरिक संगठनों ने यह स्पष्ट किया है कि उनका विरोध सिर्फ पेड़ों की कटाई को लेकर है।  
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