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Delhi : सेंसर बताएगा... सख्त होने लगीं मांसपेशियां, करना होगा इलाज, नई तकनीक के साथ मिलेगा रोबोटिक हाथ

Sun, 23 Mar 2025 06:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 23 Mar 2025 06:31 AM IST
सार

इसकी मदद से मरीज का पुनर्वास रोग गंभीर होने से पहले हो जाएगा। इसके लिए फिजियोथेरेपी विभाग के विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ मिलकर सेंसर विकसित कर रहे हैं।

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Delhi: Sensor will tell... muscles are getting stiff, treatment will be required
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विस्तार

शरीर में सख्त होती मांसपेशियां की सूचना सेंसर स्थिति गंभीर होने से पहले दे देगा। इसकी मदद से मरीज का पुनर्वास रोग गंभीर होने से पहले हो जाएगा। इसके लिए फिजियोथेरेपी विभाग के विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ मिलकर सेंसर विकसित कर रहे हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2030 तक फिजियोथेरेपी से उपचार का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा। नई तकनीक के साथ देश के फिजियोथेरेपिस्ट को रोबोटिक की सहायता मिलेगी। साथ ही एक तरह का सेंसर भी विकसित हो जाएगा जिसे शरीर पर लगाने से मांसपेशियों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा। इस सेंसर को लेकर काम शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में क्लीनिक ट्रायल भी शुरू हो जाएगा।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग की प्रमुख डॉ. पूजा सेठी ने बताया कि समय के साथ तकनीक में सुधार हो रहा है। इसी दिशा में ऐसा सेंसर भी विकसित किया जा रहा है, जिसे शरीर पर लगाने से मांसपेशियां सख्त होने की सूचना मिलेगी। सेंसर यह भी बताएगा कि उक्त जगह पर कुल कितना प्रेशर पड़ रहा है और मरीज में रोग कब तक गंभीर होगा। 
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इस सूचना की मदद से मरीज के इलाज को लेकर पहले ही तैयारी की जा सकेगी। इससे मरीज को होने वाले दर्द, शरीर की मुद्रा में आने वाले बदलाव को रोका जा सकेगा। मरीज की स्थिति को देखते हुए उसकी स्थिति के आधार पर उचित व्यायाम, शरीर की मुद्रा में बदलाव व इलाज में सुधार किया जा सकेगा। 

फिजियोथेरेपी और स्वास्थ्य सेवा में बदलाव पर हुई चर्चा
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) और आईएपी महिला सेल (आईएपीडब्ल्यूसी) ने महिला दिवस को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान फिजियोथेरेपी और स्वास्थ्य सेवा में हो रहे बदलाव पर चर्चा की गई। साथ ही नई तकनीक से इलाज में किस तरह से सुधार होगा, इसे लेकर डॉक्टरों ने अपना पक्ष रखा। 

आईएपीडब्ल्यूसी की दिल्ली राज्य प्रमुख डॉ. निधि कालरा, आईएपी के अध्यक्ष डॉ. संजीव झा ने नई तकनीक पर अपनी बात रखी। डॉ. रुचि वार्ष्णेय ने वर्ष 2030 में फिजियोथेरेपी पर अपनी बात रखी। साथ ही फिजियोथेरेपी के भविष्य, तकनीकी प्रगति और समग्र रोगी देखभाल में फिजियोथेरेपिस्ट की बढ़ती भूमिका पर विचार रखे। 

एक ही मुद्रा में लंबे समय तक काम   करने से समस्या बढ़ी
शरीर की एक ही मुद्रा में लंबे समय तक काम करने के कारण मांसपेशियों के सख्त होने की समस्या बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी, कॉरपोरेट क्षेत्र व अन्य जगहों पर काम करने वाले लोगों के शरीर में सेंसर लगाकर मांसपेशियों की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। साथ ही भविष्य के इलाज की प्लानिंग भी बना सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में आकलन से इलाज होता है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद मिलने पर इलाज में सुधार होगा। 


एक समय के बाद मरीज बैठ तक नहीं पाता : लंबे समय तक बैठे रहने, खराब शरीर की मुद्रा सहित दूसरे कारणों से गर्दन, पीठ, कलाई सहित शरीर के दूसरे अंगों में दर्द होता है। धीरे-धीरे स्थिति गंभीर होती है और एक समय के बाद मरीज बैठ तक नहीं पाता। समस्याएं बढ़ती जाती हैं। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक बैठकर काम कर रहे हर दूसरे व्यक्ति में दर्द की परेशानी है। ऐसे लोगों को तुरंत फिजियोथेरेपी विभाग से उपचार लेने की सलाह दी जाती है। भविष्य में सेंसर की मदद से ऐसे रोग की पकड़ आसान होगी।

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