Pollution Crisis : दिल्ली में स्कूल 18 तक बंद, दूसरे राज्यों की एप आधारित टैक्सियों पर भी प्रतिबंध
सभी स्कूलों को 9 से 18 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, दूसरे राज्यों में पंजीकृत एप आधारित टैक्सियों के दिल्ली में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं, 13 से 20 नवंबर के बीच घोषित सम-विषम योजना को भी अभी टाल दिया गया है।
विस्तार
प्रदूषण के गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में दिसंबर में पड़ने वाला शीतकालीन अवकाश नवंबर में ही घोषित कर दिया है। सभी स्कूलों को 9 से 18 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, दूसरे राज्यों में पंजीकृत एप आधारित टैक्सियों के दिल्ली में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं, 13 से 20 नवंबर के बीच घोषित सम-विषम योजना को भी अभी टाल दिया गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों में अभी हवा जहरीली ही बनी रहेगी। प्रतिकूल हालात से जल्द राहत मिलने वाली नहीं है। पंजाब व पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने पर भी रोक नहीं लग पा रही है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, सम-विषम फॉर्मूले के प्रभावों पर शीर्ष कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोई फैसला होगा। शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर में कहा गया है, शीतकालीन अवकाश को समय से पूर्व इसलिए किया गया है, ताकि स्कूल पूरी तरह से बंद हो जाएं और बच्चे व शिक्षक दोनों घर रह सकें।
दिल्ली समेत कई शहरों में एक्यूआई 400 पार
दिल्ली-एनसीआर के कई शहरों में बुधवार शाम चार बजे एक्यूआई 400 को पार कर गया। दिल्ली में यह 426 दर्ज किया गया, जो मंगलवार के इसी समय के 395 के मुकाबले अधिक है।
ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 478 रहा, जो अत्यधिक गंभीर श्रेणी में है। गाजियाबाद में 384 और नोएडा में 405 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, गुरुग्राम में 386 और फरीदाबाद में एक्यूआई 426 पर पहुंच गया।
कृत्रिम बारिश की तैयारी
गोपाल राय ने कहा, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कृत्रिम बारिश का सहारा भी लिया जाएगा। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने उनके साथ बैठक में बताया है कि वायुमंडल में बादल या नमी रहने पर ही कृत्रिम बारिश संभव है। विशेषज्ञों का अनुमान है, ऐसी स्थिति 20-21 नवंबर के आसपास बन सकती है। वैज्ञानिकों का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा।
क्या है कृत्रिम वर्षा
क्लाउड सीड्स वैज्ञानिक तरीके से लैब में बनाए जाते हैं। सूखी बर्फ, नमक, सिल्वर आयोडाइड समेत कई केमिकल मिलाकर विमान से आकाश में फैलाया जाता है। इससे बारिश का वातावरण बनता है।
प्रदूषण 40 गुना तक ज्यादा
एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में कोई कमी नहीं आई है। प्रदूषण की गंभीरता को व्यक्त करने वाले पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 की सांद्रता सरकारी मानकों के मुकाबले सात से आठ गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुकाबले 30 से 40 गुना ज्यादा बनी हुई है। पीएम हवा में मौजूद छोटे-छोटे प्रदूषणकारी कण होते हैं, जो नाक व मुंह के जरिये फेफड़ों में पहुंचते हैं।
पराली का 38 फीसदी योगदान
दिल्ली में पीएम प्रदूषण के स्रोत के बारे में जानकारी देने वाले डिसिजन सपोर्ट सिस्टम ने कहा है, राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के लिए 38 फीसदी तक पड़ोसी राज्यों, खासकर पंजाब-हरियाणा में जल रही पराली जिम्मेदार है। बृहस्पतिवार को इसके 27 फीसदी पर आने की उम्मीद है।
पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में आई गिरावट, फिर भी क्यों बढ़ रहा प्रदूषण
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को लेकर क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक नया विश्लेषण किया है। इससे पता चला है कि पिछले साल की तुलना में इस साल एक अक्तूबर से पांच नवंबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 48 फीसदी और हरियाणा में 38 फीसदी कमी आई है। इसके बावजूद दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, पंजाब में इन घटनाओं में सबसे ज्यादा गिरावट संगरूर में दर्ज की गई है। यहां इस अवधि में पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 46 फीसदी गिरावट देखी गई। 2022 में इनकी तादाद 4,287 थी, जबकि 2023 में 2,295 रह गई।
यह हैं महत्वपूर्ण वजहें
वाहनों, फैक्टरियों, डीजल जनरेटरों, बिजली संयंत्रों, सड़क की धूल, निर्माण व घरों का उत्सर्जन दिल्ली व एनसीआर के प्रदूषण में इजाफा करता है। पराली का धुंआ हवा के साथ जहरीले प्रदूषकों को लाता है। मौसम इसके प्रतिकूल हो तो प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा कहीं ज्यादा घातक हो जाती है। ऐसा ही कुछ इस समय भी हो रहा है।
पंजाब-हरियाणा से आने वाली तेज हवा कारण
अध्ययन के दौरान हवा के बहने के डाटा के विश्लेषण से पंजाब और हरियाणा से आने वाली हवा और दिल्ली में प्रदूषण स्तर के बीच मजबूत संबंध का पता चलता है। अक्तूबर 2023 में 81 प्रतिशत समय हवा ने इन राज्यों से प्रदूषण को दिल्ली तक पहुंचाया। क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला का कहना है कि विश्लेषण के मुताबिक, इस प्रदूषण के कारक हवा के बहाव की गति, पराली का जलना, सालभर की गतिविधियां, मौसम का पैटर्न आदि हैं। दिल्ली को प्रभावित करने वाली 81 प्रतिशत हवा पंजाब और हरियाणा से आती हैं। इस बार इन राज्यों से पराली जलाने के आंकड़ों में भारी कमी है, लेकिन वहां आने वाली हवा की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वह दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर देती है।
हरियाणा में भी बदले हालात
यहां खेतों में पराली जलने की घटनाओं में 38 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। एक अक्तूबर से पांच नवंबर 2022 के बीच कैथल के खेतों में पराली जलाने के 591 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस बार यह 68 फीसदी गिरावट के साथ केवल 189 रह गए। फतेहाबाद में यह मामले 496 से घटकर 312 रह गए।
नासा के उपकरणों व सीपीसीबी से ली मदद
इस विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने खेतों में जल रही पराली की जानकारी के लिए नासा के विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट उपकरण की मदद ली है। तापमान व हवा की जानकारी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों का उपयोग किया गया।
हवा फिर गंभीर श्रेणी में पहुंची
मौसम के बदलाव व हवा की गति कम होने से दिल्ली में हवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 426 दर्ज हुआ। यह मंगलवार की तुलना में 31 अंक ज्यादा है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, बुधवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से आठ से 12 किमी प्रतिघंटे गति से चली। दोपहर व शाम के समय हवा की दिशा बदलने और गति कम होने से प्रदूषण बढ़ गया। बृहस्पतिवार को हवा उत्तर-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा से 12 किमी प्रतिघंटे गति से चलने का अनुमान है। ऐसे में गुणवत्ता बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है। सुबह के समय धुंध के साथ कोहरा छाने की आशंका है। शनिवार को हवा उत्तर से उत्तर-पूर्व चलेंगी। साथ ही, कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।