दिल्ली के मजदूर भी कमाएंगे सालाना 1 लाख
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दिल्ली में नौकरीपेशा या अनुबंधित दैनिक मजदूर साल में एक लाख रुपये से अधिक कमाएगा। दिल्ली सरकार ने 1 अप्रैल से न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि कर दी है। नई दरों के हिसाब से सबसे निचली श्रेणी के अकुशल मजदूर को एक महीने (26 दिन) काम करने पर 9048 रुपये मिलेंगे। यानी मजदूर के पूरे साल की आय 1.08 लाख रुपये होगी। नए वेतन के हिसाब से मजदूर पूरे महीने काम करने की बजाय महीने में 24 दिन और साल में 288 दिन भी काम करता है तो भी एक लाख रुपये कमा लेगा। दिल्ली सरकार ने इससे पहले वेतन वृद्धि 1 अक्तूबर, 2014 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के हिसाब से की थी।
नई अधिसूचना के अनुसार क्लर्क स्टाफ में नॉन मैट्रिक कर्मी को भी मासिक 10 हजार रुपये यानी सालाना 1.20 लाख रुपये मिलेंगे। सरकार ने दुकान और क्लब के लिए चार श्रेणी में अलग से न्यूनतम वेतन तय किया है। इसमें भी 416 रुपये से 520 रुपये तक वृद्धि की गई है। श्रम मंत्री गोपाल राय ने बताया कि न्यूनतम मजदूरी लोगों को नहीं मिलती है तो इसकी शिकायत करें। ऐसी शिकायतें आई हैं कि सरकार से पैसे पूरे लेते हैं लेकिन कर्मी को नहीं देते। कांट्रैक्ट कर्मी रखने के लिए पंजीकृत एजेंसी से उप श्रम आयुक्तों से कहा गया है कि लाइसेंसधारियों से फार्म भरवाएं। वहीं 24 अप्रैल को कांट्रैक्ट लेबर के लिए बड़ी जनसुनवाई भी बुलाई गई है। जहां श्रम मंत्री और श्रम आयुक्त समेत तमाम अधिकारी रहेंगे।
विरोधाभासी साबित होंगे रिकॉर्ड
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अर्थिक रूप से कमजोर व सालाना एक लाख रुपये से कम की पारिवारिक आय वालों को राशन कार्ड दिया जाता है। सरकार 17.05 लाख परिवारों को कार्ड दे चुकी है जिसमें 60.39 लाख लोग शामिल हैं। अगर न्यूनतम मजदूरी को आधार बनाया जाए तो दिल्ली में लोगों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में दोनो रिकॉर्ड मिलाने पर विरोधाभासी साबित होंगे। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में इलाज के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग के राशन कार्ड को अनुमति दे रहा है। इतना ही नहीं दिल्ली सरकार ने ईडब्ल्यूएस कोटा में भी इस कार्ड को विभाग ने मान्यता दे दी है।